October 15, 2020
Jhansi Fort History in Hindi| Jhansi Fort | झाँसी के किले का इतिहास

jhansi fort history in hindi| Jhansi Fort | झाँसी के किले का इतिहास

jhansi fort history in hindi,झाँसी का किला (Jhansi Fort )भारत के राज्य उत्तरप्रदेश राज्य में स्थित है। झाँसी के किले का इतिहास सन 1613 से है  सन 1613 में झांसी के किले का निर्माण ओरछा के राजा बीर सिंह जूदेव ने करवाया था। झाँसी का किला एक चट्टानी पहाड़ी के ऊपर स्थित है। इस किले के चारो ओर झाँसी शहर बसा हुआ है। झाँसी का किला सन 1857 की क्रांति के दौरान सिपाही विद्रोह के मुख्य केंद्रों में से एक माना जाता है। सबसे ज्यादा इस किले को झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई के लिए जाना जाता है। जिन्होंने अंग्रेजो के साथ लड़ते हुए 18 जून 1858 (29 वर्ष की उम्र में) को अपने प्राणों का वलिदान कर दिया था।

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झांसी के किले | Jhansi Fort | का निर्माण ओरछा राज्य के शासक वीर सिंह जूदेव बुंदेला ने सन 1613 में करवाया था। झाँसी का किला (Jhansi Fort) बुंदेलों के गढ़ में से एक है। मोहम्मद खान बंगश ने सन 1728 में महाराज छत्रसाल को पराजित करने के इरादे से उन पर हमला किया। इस युद्ध में पेशवा बाजीराव की सहायता से महाराज छत्रसाल ने मुगल सेना को पराजित कीया । इसी का आभार प्रकट करने के लिए महाराज छत्रसाल ने उपहार सहरूप अपने राज्य का एक हिस्सा भेट किया। सन 1766 से सन 1769 तक विश्वास राव लक्ष्मण ने झांसी के सूबेदार के रूप राज किया । इसके बाद रघुनाथ राव नेवलकर (दिवतीय) को झाँसी का सूबेदार बनाया गया।

रघुनाथ राव झाँसी राज्य के राजस्व में वृद्धि कार्य किये, महालक्ष्मी मंदिर , रघुनाथ मंदिर का निर्माण रघुनाथ राव (दिवतीय) ने ही करवाया। राव की मृत्यु के उपरांत झासी की सत्ता उनके पोते रामचंद्र राव के हाथो में आ गयी, उनका कार्यकाल 1835 में उनकी मृत्यु के साथ ही समाप्त हो गया। रामचंद्र राव की मृत्यु के बाद झाँसी का उत्तराधिकारी रघुनाथ राव (तृतीय) थे जिनकी भी मृत्यु सन 1838 में हो गयी। इस समय के दरमियाँ झाँसी की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब हो गई थी! इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने गंगाधर राव को झांसी के राजा के रूप घोषित कर दीया गया ।

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Jhansi Fort History in Hindi| Jhansi Fort | झाँसी के किले का इतिहास

गंगाधर सन 1842 में राजा गंगाधर राव ने मणिकर्णिका नाम की लड़की से शादी की, जो बाद में झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई के नाम से जानी गयी। झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसे दामोदर राव नाम से संबोधित किया गया। लेकिन चार महीने के अन्तराल के बाद दामोदर राव मृत्यु हो गई। महाराज अपने बेटे की मृत्यु के पश्चात कुछ उदास रहने लगे और इसके बाद धीरे-धीरे उनका स्वास्थ भी ख़राब रहने लगा।

इन सभी परिस्थियों को देखते हुए उन्होंने झाँसी राज्य की मंगलकामना और झाँसी के उतराधिकारी के लिए अपने चचरे भाई के बेटे आनंद राव को गोद लिया, जिसका नाम उन्होंने दामोदर राव ही रखा, और इसकी सूचना ब्रिटिश गवर्नमेंट को एक पत्र के माध्यम से दी नवंबर 1853 में महाराज की मृत्यु के पश्चात ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी के अधीन “डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स” कानून लागू किया जिसके मुताविक दामोदर राव (आनंद राव) के सिंहासन के दावे को खारिज कर दिया गया।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लक्ष्मी बाई को महल छोड़ने का आदेश दिया गया। मार्च-अप्रैल 1858 में कैप्टेन हयूरोज की कंपनी बलों ने किले को चारो तरफ से घेर लिया और 4 अप्रैल 1858 को किले पर कब्जा कर लिया। ब्रिटिश सेनिक और रानी लक्ष्मी बाई बिच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमे रानी लक्ष्मी बाई को वीरगति मिली सन 1861 में ब्रिटिश सरकार ने झांसी किला और झांसी शहर को ग्वालियर के महाराज जियाजी राव सिंधिया के हवाले कर दिया। लेकिन बाद में अंग्रेजों ने 1868 में ग्वालियर से झांसी वापस ले लिया।

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झाँसी का किला की जानकारी–Jhansi Fort Information In Hindi

झाँसी का किला की जानकारी–Jhansi Fort Information In Hindi
झाँसी का किला की जानकारी–Jhansi Fort Information In Hindi

ऊँची पहाड़ी पर खडा झाँसी के किले को देखने में अपनी वीरता की झलक आती है, किले का निर्माण की उत्तर भारतीय शैली और दक्षिण भारतीय शैली से कैसे भिन्न है। इस किले की दीवारें ग्रेनाइट 16 से 20 फीट मोटी हैं और दक्षिण की तरफ शहर की दीवारों से मिलती हैं। किले में प्रवेश करने के लिए 10 द्वार बने हुए है। इन द्वारो का नाम उन्नाव गेट, ओरछा गेट, बड़गांव गेट, लक्ष्मी गेट, खंडेराव गेट, दतिया दरवाजा, सागर गेट, सैनिक गेट और चांद गेट हैं।

इस किले में उल्लेखनीय और दर्शनीय जगह शिव मंदिर, प्रवेश द्वार पर गणेश मंदिर है , सन 1857 के विद्रोह में इस्तेमाल की जाने वाली कड़क बीजली तोप भी देखने को मिलती है। किले के पास में ही रानी महल है जिसे 19वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था और वर्तमान में यहा एक पुरातात्विक संग्रहालय है। यह किला 15 एकड़ के एरिया में फैला हुआ है।

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झाँसी में घुमने की जगह –jhansi tourist places in hindi

झाँसी का किला एक आकर्षण ऐतिहासिक विरासत हैं। झासी का प्रमुख आकर्षण झाँसी का भव्य किला है, जहाँ रानी लक्ष्मीबाई और ब्रिटिश सेना के बिच युद्ध हुआ था। आप झाँसी का हर्बल गार्डन (Jhansi’s Herbal Garden) का भ्रमण भी कर सकते हैं,आप परिछा का घूम सकते हैं, जो एक सुन्दर बांध है झाँसी में घुमने के लिए आप अनेक पर्यटन स्थल हैं, जिसमें महाराजा गंगाधर राव की छतरी, गणेश मंदिर और महालक्ष्मी मंदिर शामिल हैं। वर्तमान में ही प्रारंभ हुआ झाँसी महोत्सव आपको इस क्षेत्र की कला और शिल्प का आनंद उठाने उठा सकते है। जो हर वर्ष फरवरी – मार्च में आयोजित होता है। यहाँ घुमने के लिये बहुत अछी अछी जगह है,

झाँसी का हर्बल गार्डन–Jhansi’s Herbal Garden

झाँसी का हर्बल गार्डन (Jhansi’s Herbal Garden) बहुत ही सुहानी जगह है, झाँसी का हर्बल गार्डन में 20000 अलग-अलग पेड़-पौधे हरा भरा रहता है। यहा आने वाले सभी उम्र के पर्यटकों के लिए सुखद अनुभव का एहसास होता है। सेलानियो और फोटूग्राफर के लिए ये जगह बहुत ही लोकप्रिय है। यदि आप झाँसी हर्बल गार्डन की सैर करने का अवसर मिलता है तो कभी भूल नहीं पाओगे। टाइगर प्रॉल के नाम से लोकप्रिय (Jhansi’s Herbal Garden) अपने आप को फिर से जीवंत करने के लिए एक सुखद अनुभव है।

रानी लक्ष्मी बाई पार्क – Rani Lakshmi Bai Park

रानी लक्ष्मी बाई पार्क – Rani Lakshmi Bai Park
रानी लक्ष्मी बाई पार्क – Rani Lakshmi Bai Park

रानी लक्ष्मी बाई पार्क झाँसी का एक खुबसूरत पार्क है ये पार्क यहाँ के वासिंदो के साथ यहा आने वाले विदेशी पर्यटकों की भी लोकप्रिय है। शाम होने के साथ ही यह पार्क रंग-बिरंगी रौशनीयों से जगमगा जाता है। शाम होते ही रानी लक्ष्मी बाई पार्क घुमने वाले वालो की भीड़ लग जाती है, जिससे इस स्थान पर परम सौंदर्य की अनुभूति होती है। रानी लक्ष्मी बाई पार्क में अपने प्रियजनों और परिवार के साथ गुमने जा सकते है।

झाँसी रानी महल – jhansi Rani Mahal

रानी महल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के झाँसी का शाही महल है। इस महल का निर्माण नेवलकर परिवार के रघुनाथ दिवतीय ने करवाया था। रानी महल को बाद में रानी लक्ष्मीबाई के लिए एक निवास स्थान बनाया गया। वास्तुकला की दृष्टि से यह महल एक सपाट दो मंजिला इमारत है। जिसमें एक कुआँ और एक फव्वारा है। महल में छह हाल, समानांतर गलियारा हैं।

झाँसी महालक्ष्मी मंदिर – jhansi Mahalaxmi Temple

झाँसी का महालक्ष्मी मंदिर यहा का एकएतिहासिक प्राचीन मंदिर है जो देवी महालक्ष्मी को समर्पित है। महालक्ष्मी मंदिर झाँसी के अन्य पर्यटक स्थलों में से एक महत्वपूर्ण स्थल है। झाँसी का यह पवित्र मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं। झाँसी घूमने आने वाले पर्यटक महालक्ष्मी मंदिर आकर देवी माँ के दर्शन जरुर करते है, यहाँ सन्ति प्राप्त होती है,

महाराज गंगाधर राव की छत्री – Maharaj Gangadhar Rao’s Chhatri

यह छत्री झाँसी के महाराजा गंगाधर राव को समर्पित है। इस छत्री का निर्माण उनकी पत्नी लक्ष्मी बाई के द्वारा ही करवाया गया था। गंगाधर राव झाँसी के राजा होने के साथ-साथ लक्ष्मी बाई के पति भी थे। महाराज गंगाधर राव की छत्री झाँसी के प्राचीन स्मारकों में से एक है और यह छत्री झाँसी आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षणकरती है।

परिछा, झाँसी- Parish, Jhansi

परिछा झाँसी के महत्वपूर्ण स्थानों से है। जो बेतवा नदी के ऊपर बनाया गया एक बाँध का नाम है, परिछा झाँसी शहर से 25 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह बाँध पानी के खेलों के लिए लोकप्रिय है विशेष रूप से उनके लिए जिन्हें बोटिंग बहुत की जाती है। ये झाँसी राजमार्ग पर स्थित है। परिछा थर्मल पावर स्टेशन के कारण यह स्थान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सी.आई.एस.एफ) के अंतर्गत आता है। परिछा पावर प्लांट कोयले पर आधारित पावर प्लांट है जो 1140 मेगावॉट बिजली का उत्पादन करता है।

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