त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर का इतिहास, महत्त्व,कहानी | Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple History Hindi

05/03/2024

Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple History Hindi – त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर नासिक स्थित हैं। नासिक से त्र्यंबकेश्वर की दूरी 30 km है।त्रिम्बकेश्वर शिव मंदिर ज्योतिलिंग भगवान् शिव के 12 ज्योतिलिगो में से एक है। ये आठ नंबर का विशेष ज्योतिलिंग माना जाता है। इस मंदिर के पास ही गोदावरी नदी प्रवाहित होती है। गोदावरी नदी का उदगम स्थान ब्रह्म गिरि नाम के पर्वत पर बना है। ये पुरे विश्व भर में अपनी पहचान बनाये हाउ है। त्र्यम्बकेश्वर धाम हिन्दुओ का प्रमुख तीर्थ स्थल है। इस मंदिर के भीतर एक हिस्से में छोटा-सा गठ्ठा बना हुआ। इस गठ्ठे में भगवान् शिव के तीन छोटे-छोटे लिंग स्थापित किये हुए है। इन तीनो शिवलिंगों को भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के रूप के प्रतीक कहे जाते हैं।

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर का इतिहास, महत्त्व,कहानी|Trimbakeshwar Temple History Hindi

त्र्यम्बकेश्वर धाम में भगवान शिव स्वयं विराजमान हुए थे। इसलिए हिन्दू धर्म के लोगो के लिए इस स्थान का विशेष महत्व है। ये त्र्यम्बकेश्वर धाम भगवान् शिव को समर्पित है। त्र्यम्बकेश्वर मंदिर गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। इसका काले पत्थरों से किया हुआ है। ये मंदिर बहुत ही सुन्दर बनाया गया है। इसकी मंदिर की कलाकृति बहुत ही शानदार और अद्धभुत है। जिन मनुष्यों में कालसर्प दोष पाया जाता है वे यहाँ अपने कालसर्प दोष से मुक्ति पाने यहाँ आते है।

इस पवित्र स्थान पर कालसर्प दोष की शांति, त्रिपिंडी विधि और नारायण नागबलि की पूजा करवाई जाती है। ये सभी पूजा व्यक्ति अपने ग्रस्त जीवन की शांति और विपतियो से मुक्त होने के लिए करवाते है। इस मंदिर का पुननिर्माण नाना साहब ने करवाया था। सन 1755 में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। और इसका सम्पूर्ण कार्य सन 1786 में पूरा हुआ था।

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर का महत्त्व |Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple

ये ज्योतिलिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष माना जाता है। इस स्थान से हिन्दुओ धर्म के लोगो की वंशावली का पंजीकरण भी किया जाता है। गोदावरी नदी का उदगम स्थान भी त्र्यम्बकेश्वर के निकट ही स्थित है। प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी गोदावरी के मंदिर के प्रांगण में कुसवर्ता कुण्ड भी बना हुआ है। त्रिंबकेश्वर मंदिर में भगवान् शिव के तीनमुखी पिण्ड स्थित है। ये तीनो पिंडो भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अस्तित्व रूपी पिण्ड माने जाते है।

लोगो की धार्मिक आस्था के अनुसार इन पिंडो का कटाव होना मानव जाति के विनाश के संकेतो की निशानी है। तीनो पिंडो को सुन्दर-सुंदर आभूषनों से सुर्जित किया गया है। इन लिंगो के शिखरों पर मुकुट पहनाये गये है। जो पहले त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश को चढ़ाये जाते थे। ये मुकुट प्राचीन समय में पांडवो द्वारा भी चढ़ाया गया था। इस मुकुट को हीरे, जवाहरात और बहुत से कीमती पत्थरो से सजाया गया है। सोमवार दिन इस मुकुट के दर्शन भक्तो को 4-5 PM के मध्य करवाए जाते है। भगवान् शिव का ये मुकुट बहुत ही अद्धभुत है। इसके दर्शन करने से व्यक्ति की किस्मत बदल जाती है। उनके जीवन में खुशियों का आवागमन होता है।

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा-Story of Trimbakeshwar Jyotirlinga temple in Hindi

प्राचीनकाल में त्र्यंबक में गौतम ऋषि हुए थे,जो भारत के महान ज्ञानी पुरुष माने जाते थे। त्र्यंबक गौतम ऋषि की तपोभूमि मानी जाती है। जब गौतम ऋषि पर गोहत्या इल्जाम लगा तो वे इसे बहुत दुखी हुए थे। इसलिए गौतम ऋषि ने इस पाप से मुक्ति पाने के लिए शिव की घोर तपस्या की। जब भगवान् शिव ने गौतम ऋषि को दर्शन दिए,तो गौतम ऋषि ने एक वरदान माँगा था।

उन्होंने वरदान में गंगा को इस स्थान पर प्रवाहित करने की प्रार्थना की। तब भगवान् शिव ने दक्षिण की गंगा अर्थात गोदावरी नदी को धरती पर अवतरित किया था। गोदावरी के उद्गम,अलावा गौतन ऋषि ने भगवाण शिव को स्वयं इस स्थान पर विराजमान होने की बात कही थी। गौतम ऋषि के बहुत आग्रह के बाद शिव इस मंदिर में विराजमान हुए। भगवान् शिव क तीन नेत्रों होने कारण ये स्थान त्र्यंबक नाम से ही प्रसिद्द हुआ। जिस तरह शिव को उज्जैन और ओंकारेश्वर का राजा माना जाता है। त्र्यंबकेश्वर को भी को इस गाँव का राजा कहा जाता है।

महर्षि गौतम जी के शिष्य से ऋषियों की पत्नियां जल पहले भरने के विषय में झगड़ने लगी। इन सब का शोर सुनकर वहा माँ अहिल्या वहा पहुंची। उन्होंने बालको का पक्ष लेते हुए बोली कि ये बालक आप सब से पहले यहाँ आये है। तो पहले इन्हे जल भरकर ले जाने दीजिए। ऋषियों की पत्नियों को लगा की ये जल महर्षि गौतम की दें है, इसलिए माँ अहिल्या अपने शिष्यों का पक्ष ले रही है। और अपने बालको को पहले जल भरा रही है। ऋषियों की पत्नियाँ माँ अहिल्या की इस बात से बुरा मानकर उनसे नाराज हो गई थी। घर लौटकर सभी ओरतो ने इस बात का जिक्र अपने पतियों के सामने किया। ऋषियों की पत्नियो द्वारा इस बात को काफी बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया।

इस बात से सभी ऋषि गौतम ऋषि पर क्रोधित हो उठे थे। और उन सब ने गुस्से में आकर ऋषि गौतम से बदला लेने का निश्चय किया। तब उन सभी स्त्रियों ने ये बात अपने-अपने पतियों को घर जाकर बड़ा-चढ़ा कर बताई। ऋषियों को गुस्सा आया और उन सभी ने महर्षि गौतम से बदला लेने का सोचा। उन सभी ने भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना करना शुरू कर दिया।

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर का कहानी|Trimbakeshwar Temple History Hindi

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर का कहानीTrimbakeshwar Temple History Hindi
त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर का कहानीTrimbakeshwar Temple History Hindi

इसलिए उन सब ऋषियों ने मिलकर भगवान् गणेश जी की पूजा-अर्चना करनी प्रारम्भ की। उनकी पूजा-आराधना से भगवान् गणेश खुश हुए,और उन सभी को दर्शन दिए। ऋषियों ने महर्षि गौतम से बदला लेने के लिए उन्हें नीचा दिखाने के लिए भगवान गणेश जी से मदद मांगी। उन सब ऋषियों की बाते सुनकर गणेश जी ने कहा कि महर्षि गौतम से बदला लेने के आपके भाव सही नही है।

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर का इतिहास | Trimbakeshwar Temple History Hindi

त्र्यम्बकेश्वर मंदिर का इतिहास वर्तमान समय से 500 वर्ष पुराना माना जाता है। त्र्यम्बकेश्वर शहर बाद में त्रिंबकेश्वर के नाम से जाना जाने लगा। नाना साहेब पेशवा के शासनकाल में त्रिंबकेश्वर मंदिर के निर्माण और त्रिंबकेश्वर शहर के विकास की योजना बनाई गयी थी। नाना साहब के द्वारा ही इस कार्य को आरंभ किया गया था।

ब्रह्मगिरी पर्वत 18 किलोमीटर की दुरी पर नासिक जिले के नासिक शहर में स्थित है ब्रह्मगिरी पर्वत सह्याद्री घाटी का ही हिस्सा माना जाता है। यहाँ का मौसम सदैव ही सुहावना रहता है। इस पर्वत की समुद्र तल से ऊंचाई 3000 फीट है। त्रिंबकेश्वर शहर पर्वत के निचले हिस्से में बसा हुआ है। इस स्थान पर जाने के लिए दो मार्ग बने हुए है।

पहला रास्ता श्री काशीनाथ घाटी से 871 पार करके जाया जाता है। नासिक से यात्रियों को सरलता से यातायात के साधन उपलब्ध हो जाते है। दूसरा रास्ता इगतपुरी-त्रिंबकेश्वर से होकर निकलता है। ये रास्ता पार करने में काफी समय लगता है। क्योकि ये रास्ता त्र्यम्बकेश्वर से 28 किलोमीटर दूर पड़ता है। यातायात के साधनों की सुविधा यहाँ सिमित ही पाई जाती है। ये शहर 120 वर्षो से नगर निगम की देख-रेख में है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर दर्शन और पूजा का समय -Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple Darshan and Puja Timings

Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple Darshan and Puja Timings

नासिक का त्र्यम्बकेश्वर मंदिर विश्व के सभी देशो में ख्याति प्राप्त किये हुए है। ये हिन्दुओ का प्रमख तीर्थ स्थल है। इसलिए यहाँ साल भर भक्तों की कतार लगी रहती है। देश-विदेश से यात्री और पर्यटक त्र्यम्बकेश्वर धाम के दर्शन के लिए आते है। त्र्यम्बकेश्वर का द्वार भक्तो के लिए सुबह 6 बजे से खोल दिया जाता है। और मंदिर के द्वार रात को 9 बजे के बाद वापस बंद कर दिए जाते है। इस मंदिर में भगवान् त्र्यम्बकेश्वर की पूजा पूरे दिन में अलग-अलग प्रकार से की जाती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में की जाने वाली मुख्य पूजा इस प्रकार हैं।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की प्रसिद्ध पूजा – महामृत्युंजय पूजा

महामृत्युंजय पूजा का मानव जाति के लोगो के लिए की जाने वाली पूजा है।महामृत्युंजय पूजा का सम्बन्ध व्यक्ति के शारीरिक पीड़ा को दूर करने हेतु करवाई जाति है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पूजा व्यक्ति को पुरानी बीमारियों से मुक्त कर निरोग जीवन प्रदान करने वाली मानी जाती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महामृत्युंजय पूजा का समय सुबह 7 बजे से 9 बजे तक का होता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर रुद्राभिषेक की पूजा

ये पूजा भगवान् शिव के रुद्राभिषेक के लिए की जाती है। इस पूजा को करने में पंचामृत यानि दूध, घी, शहद, दही और शक्कर की आवश्यकता होती है। इस पूजा को करते समय भावपूर्ण भगवान् शिव के मंत्रों और श्लोकों का पाठ का उच्चारण किया जाता है। इस पूजा के लिए समय 7:00 से 9:00 बजे के अंतराल का होता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की लघु रुद्राभिषेक की पूजा

लघु रुद्राभिषेक की पूजा स्वास्थ्य और धन सम्बन्धी समस्याओं (Monetary Problem) को दूर करने के लिए की जाती है। ये व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभावों का नतीजा है। लघु रुद्राभिषेक की पूजा करवाकर इन समस्याओं से निकल सकते है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की मुख्य पूजा महा रुद्राभिषेक पूजा

त्र्यम्बकेश्वर धाम में महा रुद्राभिषेक पूजा भी की जाती है। इस पूजा के दौरान मंदिर में ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद का पाठ किया जाता है। जिससे व्यक्ति को सभी प्रकार की पीड़ा और समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर काल सर्प पूजा

काल सर्प दोष का मानव जीवन में बहुत प्रभाव देखे जाते है। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन के काल सर्प दोष से मुक्ति पाने हेतु ये पूजा करवाना अनिवार्य माना जाता है। इस पूजा को व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु की दशा को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। काल सर्प दोष का व्यक्तिओ के जीवन पर अलग-अलग प्रकार से प्रभाव होता है। काल सर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए निम्न पूजा करवाई जाती है अनंत कालसर्प, कुलिक कालसर्प, शंखापान कालसर्प, वासुकी कालसर्प, महा पद्म कालसर्प और तक्षक की पूजा आदि है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में नारायण नागबली पूजा

नासिक के त्र्यम्बकेश्वर मंदिर में लोग नारायण आगबली की भी पूजा करवाते है। ये पूजा पितृ दोष से बचने के लिए की जाती है। पितृ दोष का अर्थ होता है- पूवर्जों के द्वारा दिया जाने वाला श्राप। पितृ दोष के कारण घर-परिवार की स्थिति और शांति नष्ट हो जाती है।

इसका प्रभाव पुरे परिवार वालो को झेलना पड़ता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए नारायण नागाबली की पूजा करवाना उचित माना जाता है। यह मंदिर जहां पर लोग काल सर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा कराते हैं। तथा इन पूजाओ को करवाने हेतु व्यक्ति को पर्याप्त समय लेकर ही जाना होता है।

क्योकि इस पूजा में काफी लम्बी विधिया करनी होती है। जिसमे 3 या 4 दिन लगती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु त्योहार और उत्सव के समय आते है। क्योकि इस समय मंदिर के दर्शन करना बहुत ही शुभ होता है। इस मंदिर में बहुत धूम-धाम से त्यौहारों और उत्सवो की तैयारिया चलती है। ये उत्सव पुरे विश्व भर में प्रसिद्द है। इन्हें देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहाँ आते है। यहाँ का नज़ारे बहुत ही मनोरम लगते है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय – Best time to visit Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नासिक का सबसे विशाल स्थल है। धार्मिक दृष्टि से इसका बहुत महत्व माना जाता है। त्र्यम्बकेश्वर मंदिर में लोग धार्मिक रूप से और घुमने की दृष्टि से भी आते है। यहाँ जाने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का महिना उत्तम रहता है। क्योंकि नासिक में इस समय अन्य राज्यों की वजाय कम सर्दी पड़ती है।

सर्दियों में तापमान अनुकूल ही रहता है। श्रद्धालुओ को सर्दियो में यहाँ आना बहुत पसंद आता है। इन महीनो में यहाँ पर्यटकों की काफी भीड़ देखी जाती है। लेकिन इस समय सभी चीजें यहाँ महंगी मिलती हैं। कम बजट वालो के लिए मानसून का मौसम उपयुक्त रहता है। क्योकि इस समय यहाँ चीज़े कम दाम में मिल जाती है। इसके लिए जुलाई से सितंबर के मध्य का समय सही रहता हैं। त्र्यम्बकेश्वर धाम में पुरे साल यात्रियों का आवागमन चालू रहता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में कहां रुकें – Where to stay in Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple

नासिक का त्र्यम्बकेश्वर मंदिर काफी पुराना है। ये पुरे विश्व भर में प्रसिद्द है। इसलिए यहाँ देश-विदेश के सभी क्षेत्रो से पर्यटक और श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन करने आते है। सालभर अधिक संख्या में भीड़ इकठ्ठा होती है। इसलिए यहां शुरू से श्रद्धालुओ के ठहरने के लिए उचित स्थानों की व्यवस्था की गई। त्र्यंबक में पर्यटकों को रुकने के लिए सस्ते और महंगे दोनों कीमतों में होटल और गेस्टहाउस उपलब्ध है।

पर्यटक यहाँ विश्राम हेतु अपने बजट के हिसाब से रूम किराये पर ले सकता है। यहां के कुछ प्रसिद्द होटल सम्राट, होटल रॉयल हेरिटेज, सिटी प्राइड होटल, होटल पंचवटी यात्री, होटल मिड टाउन इन, होटल रामा हेरिटेज, होटल राजमहल, होटल शांतिदत्ता स्थित है। इन होटलों के अलावा कुछ महंगे बजट के होटल भी है। फाइव स्टार और लक्जरी होटल जो यहाँ के प्रसिद्द होटल है। पर्यटक इन होटलों में आराम कर त्र्यम्बकेश्वर के मंदिर के दर्शन शांति से कर सकता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर कैसे पहुंचे – How to reach Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple

त्र्यंबकेश्वर नासिक जिले के नासिक शहर के ही स्थित है। यह मुख्य नासिक शहर से 30.3 किमी दुरी पर स्थित है। यहाँ यात्रियों के लिए रोडवेज साधनों की सुविधा भी पाई जाती हैं। त्र्यंबकेश्वर जाने के लिए बस या टैक्सी का भी उपयोग क्र सकते है। त्र्यंबकेश्वर की यात्रा करने के लिए सड़क मार्ग सबसे अच्छा मार्ग माना जाता है। सड़क मार्ग से त्र्यम्बकेश्वर का रास्ता केवल 41 मिनट शेष माना जाता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ट्रेन से केसे पहुंचें Trimbakeshwar Jyotirlinga Temple

त्र्यंबकेश्वर शहर में कोई भी रेलवे स्टेशन नहीं बना हुआ है। नासिक शहर का रेलवे स्टेश ही इसके समीप है। जो त्र्यम्बकेश्वर से करीब 177 किमी दूर स्थित है। पर्यटक व यात्री आसानी से मुंबई या भारत के किसी अन्य शहर से नासिक के रेलवे स्टेशन आ हैं। और फिर त्र्यम्बकेश्वर जाने के लिए यहां से टैक्सी लेनी पड़ती है।

हवाई जहाज से त्रिम्बकेश्वर कैसे पहुंचें

त्रिम्बकेश्वर में हवाई मार्ग की भी सुविधा नही पाई जाती है। क्योकि इस क्षेत्र में कोई हवाई अड्डेका निर्माण नहीं हुआ है।नासिक का हवाई अड्डा इसके पास का है। त्र्यम्बकेश्वर से गांधीनगर हवाई अड्डा 31 किमी दूर स्थित है। ये हवाई अड्डा मुंबई से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। नासिक हवाई अड्डे की सहायता से हवाई अड्डे से त्रयंबकेश्वर के लिए टैक्सी करके त्र्यम्बकेश्वर धाम पहुंचा जा सकता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर बस से कैसे पहुंचे

त्रिम्बकेश्वर की यात्रा करने के लिए सड़क मार्ग सबसे अच्छा मार्ग है। ये क्षेत्र पूणे और मुंबई के यातायात केन्द्रों से जुड़ा हुआ है। इस शहरो से त्र्यम्बकेश्वर के लिए साधन व्यवस्था सरलता से मिल जाती है। यहाँ से हम राज्य परिवहन की बसों, लक्जरी बसों का या फिर टैक्सी से त्रयंबकेश्वर की यात्रा पर जा सकते है।

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