July 2, 2020
tanot mata temple history in hindi तनोट माता मंदिर की जनकारी

tanot mata temple history in hindi तनोट माता मंदिर की जनकारी

tanot Mata temple history in Hindi पाकिस्तान की सीमा से सटा राजस्थान में बसा जैसलमेर शहर, से 120 किलोमीटर दूर तनोट माता मंदिर देश भर के आस्था का केंद्र है, श्री तनोट माता का वो मंदिर है, जो भारत पास के युद्ध में एक खरोच तक नहीं आई, सन 1965 में भारत पाक युद्ध समय पाकिस्तान की तरफ हजारो गोला बारूद तनोट माता मंदिर (tanot mata mandir) पर बरसाए गये थे, मंदिर परसिर में 500 से ज्यादा बम्ब गिरे, मगर एक भी बम्ब नहीं फटा, एक दो बम्ब न तो इतफाक हो सकता है, मगर सेंकडो बम्ब ना पटना किसी चमत्कार से नहीं था, आज श्री तनोट माता के इस चमत्कारी मदिर को देखने देश विदेश से पर्यटक आते है,

tanot Mata temple history in Hindi तनोट माता मंदिर का इतिहास

tanot Mata temple history in Hindi भारत देश बहुत से आश्चर्यजनक पर्यटन स्थानों से भरा है, देश में कुछ स्थान ऐसे हैं, जिसे हर कोई देखना या उस जगह के बारे जानना चाहता है, तनोट माता मंदिर (tanot mata mandir ) भी एक ऐसा ही स्थान है। तनोट माता मंदिर राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित है, जो पाकिस्तान के साथ भारत की सीमा के बहुत करीब है। यह मंदिर 1965 व् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध सुरिक्षित रहा, मंदिर चारों ओर से भारी बमबारी के बावजूद खड़ा था। यह लोंगेवाला के भारत-पाक युद्ध स्थल के बहुत करीब स्थित है।

जैसलमेर में भारत पाक सीमा पर बने तनोट माता के मंदिर से भारत पाकिस्तान युद्ध 1965 की कई अजीबोगरीब यादें जुडी हुई हैं। यह मंदिर भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के फौजियों के लिए भी आस्था का केन्द्र रहा है। 1965 के भारत पाक युद्ध से माता की कीर्ति और अधिक बढ गई जब पाक सेना ने भारतीय सीमा के अन्दर भयानक बमबारी करके लगभग 3000 हवाई और जमीनी गोले दागे, लेकिन तनोट माता की कृृपा से एक भी गोला नहीं फटा। इस घटना के गवाह के तौर पर आज भी मंदिर परिसर में 500 गोले रखे हुए हैं, जो युद्ध के बाद मंदिर के पास की जमीन में दबे मिले थे।

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तनोट माता मंदिर जाने का अच्छा समय Best time to visit Tanot Mata Temple

तनोट माता मंदिर जाने का अच्छा समय Best time to visit Tanot Mata Temple
तनोट माता मंदिर जाने का अच्छा समय Best time to visit Tanot Mata Temple

मंदिर होने के कारन तनोट माता मंदिर में साल भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। आमतौर पर त्यौहारों के मौसम में मंदिरों का दौरा किया जाता है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर तनोट माता मंदिर जाने से एक विशेष अनुभूति होती है जिसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है। इस प्रसिद्ध मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी तक सर्दियों के दौरान है। साल के अन्य महीनों के दरमियान इस क्षेत्र में बहुत गर्मी होती है,

कैसे पहुंचे तनोट माता मंदिर How to reach Tanot Mata Temple

तनोट माता मंदिर तक पहुँचने का सबसे अच्छा मार्ग जैसलमेर से सड़क मार्ग से है। यह जैसलमेर से 120 किमी की दूरी पर स्थित है और पहुंचने में 1 घंटे 30 मिनट का समय लगता है। राजस्थान के विशाल रेत के टीलों से घिरा मार्ग सबसे सुंदर रेगिस्तानी मार्ग है, जैलमेर से तनोट माता मंदिर तक का मार्ग आपको हमेशा के लिए संजोने के लिए सड़क यात्रा यादगार बना देगा। आप अपनी यात्रा को तनोट माता मंदिर में लोंगेवाला चौकी के साथ जा सकते हैं।

हालांकि, आपको तनोट बैरिंग से लोगेवाला पोस्ट पर जाने के लिए एक परमिट प्राप्त करने की आवश्यकता है जिसे आपको आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।सबसे सुविधाजनक बात यह है कि आप जैसलमेर से तनोट माता मंदिर और लोंगेवाला के लिए टैक्सी ले सकते हैं। हालांकि, यात्रियों ने भी अपने निजी वाहनों में यह यात्रा कर सकते है। जैसलमेर से तनोट तक रामगढ़ से होकर जाने वाली शानदार सड़क बहुत अच्छी है। विशाल पवन चक्कियों और जंगली ऊंटों और हिरणों को हर समय इस रस्ते पर देखा जा सकता है, यह एक सड़क यात्रा के लायक है।

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तनोट माता मंदिर की पौराणिक कथा Story of Tanot Mata Temple in hindi

पौराणिक कथा के अनुसार तनोट माता मंदिर करीब 1200 साल पहले करवाया गया था, तनोट माता मंदिर के बनने के पीछे एक रोचक कहानी बहुत प्रचलित है. कथा केअनुसार से राजस्थान के जैसलमेर में मौजूद चेलक गांव में मामडिया चारण नाम का एक व्यक्ति रहता था,.मामडिया चारण कोई संतान नहीं थी. लोगों ने उसे पूजा पाठ करने की सलाह दी, तो उसने माता हिंगलाज की पूजा करनी शुरू कर दी,

मामडिया चारण ने माता हिंगलाज की तपस्या में लींन हो गया, और रात दिन माँ हिंगलाज की तपस्या करने लगा, मामडिया चारण ने हिंगलाज माता के मंदिर तक सात बार पैदल यात्रा की. कहते हैं, वर्तमान में हिंगलाज माता का मंदिर बलूचिस्तान में स्थित है, कठिन तपस्या के बाद माँ हिंगलाज उनकी की तपस्या से प्रसन्न हो जाती है, और माँ हिंगलाज उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन माता हिंगलाज उनके सपने में आती है, और उनसे पूछा कि उन्हें संतान के रूप में बेटा चाहिए या बेटी

tanot Mata temple history in Hindi तनोट माता मंदिर का इतिहास

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tanot Mata temple history in Hindi तनोट माता मंदिर का इतिहास

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मामडिया चारण ने माता हिंगलाज से ही उसकी संतान के रूप में जन्म लेने का वचन लेता है, माता हिंगलाज ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उसकी प्रथम संतान के रूप में जन्म लिया. बाद में ये ही आवड़ देवी यानी तनोटराय माता के नाम से जानी गईं. आवड़ देवी के अलावा उनकी 6 बहनें थीं, जिनके नाम आशी, सेसी, गेहली, होल, रूप व लांग थे.

अपने जीवन में आवड़ देवी ने बहुत सारे चमत्कार दिखाए. इन चमत्कारों से वो आस-पास के इलाकों में प्रसिद्ध होती चली गईं. तनोटराय स्थान के नाम के कारण वो माता तनोटराय नाम से प्रसिद्ध हुईं. तनोट के अंतिम राजा भाटी तनुराव थे, जिन्होंने इस मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई थी.

बीएसएफ ही करती है तनोट माता मंदिर की पूजा और रखरखाव Tanot Mata Mandir history in hindi

भारतीय सेनिको ने 1965 के भारत पाक युद्ध के चमत्कार के बाद से बीएसएफ ने यहां एक चौकी स्थापित कर दी थी. साथ ही इस मंदिर के रखरखाव का पूरा जिम्मा ले लिया. बीएसएफ द्वारा मंदिर की पूजा और प्रबंध संचालन के लिए एक ट्रस्ट तक बनाया गया है. रोजाना बीएसएफ के जवान ड्यूटी पर निकलने से पहले तनोटराय माता का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते. कई मौकों पर बीएसएफ के जवान यहां रात्रि भजन कीर्तन का भी आयोजन करते रहते हैं. उनका भरोसा है कि तनोटराय माता के आशीर्वाद से दुश्मन उनका बाल भी बांका नहीं कर सकता है

माथा टेकने पाकिस्तानी ब्रिगेडियर भी आए थे

1965 के युद्ध के दौरान माता के चमत्कारों के आगे नतमस्तक हुए पाकिस्तानी ब्रिगेडियर ‘शाहनवाज खान’ ने भारत सरकार से यहां दर्शन करने की अनुमति देने का अनुरोध किया। करीब ढाई साल बाद भारत सरकार से अनुमति मिलने पर ब्रिगेडियर खान ने न केवल माता के दर्शन किए, बल्कि मंदिर में चांदी का छत्र भी चढ़ाया जो आज भी मंदिर में है।

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तनोट माता का मंदिर कहा स्थित है – जैसलमेर से तनोट माता का मंदिर कितना किलोमीटर है?

Tanot Mata Mandir तनोट माता का मंदिर भारत के राज्य राजस्थान के पश्चिम में स्थित है, पाकिस्तान की सीमा से सटा राजस्थान में बसा जैसलमेर शहर है, जैसलमेर से तनोट माता का मंदिर की दुरी 120 किलोमीटर है, तनोट माता मंदिर देश भर के आस्था का केंद्र है,

tanot mata temple image तनोट माता मंदिर की फोटू

tanot mata temple image तनोट माता मंदिर की फोटू
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