October 15, 2020
महादेव का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर।bheemaashankar jyotirling

महादेव का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर।Bheemaashankar Jyotirling

महादेव का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर।bheemaashankar jyotirling ,भीमाशंकर मंदिर पुणे शहर के भोरगिरि गांव खेड़ से 50 किलोमीटर दूर बना हुआ। ये भगवान् शिव के 12 ज्योतिलिंगो में से एक है। महाराष्ट्र के पुणे शहर से ये 110कि.मी. दूर उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है। ये हिन्दुओ का प्राचीन धार्मिक स्थल है। यहाँ साल भर देश और विदेश से यात्री और पर्यटक घुमने आते है। ये मंदिर सह्याद्रि पर्वत के पश्चिमी घाट स्थित है। भीमाशंकर ज्योतिलिंग भीमा नदी के तट पर स्थित है। भीमा नंदी यहाँ से निकलकर दक्षिण पश्चिम दिशा में प्रवाहित होती है। भीमा नंदी रायचूर जिले में प्रवाहित कृष्णा नंदी में जाकर विलीन हो जाती है। ये ज्योतिलिंग शिव का विशेष और प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

भीमाशंकर मंदिर का इतिहास-bheemaashankar mandir ka itihaas

महादेव का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर।bheemaashankar jyotirling भीमाशंकर ज्योतिलिंग का विवरण हिन्दुओ के प्रमुख ग्रन्थ शिवपुराण में किया गया है। शिवपुराण में भगवान शिव के सभी ज्योतिलिंगो का विस्तार से वर्णन किया गया है। शिवपुराण में भीमाशंकर ज्योतिलिंग के बारे में कहा गया है, कि ये छठा ज्योतिलिंग है। इसकी स्थापना के पीछे प्राचीन इतिहास है। एक पौराणिक कथा के अनुसार रावन का भाई कुंभकर्ण के भीम नाम का पुत्र हुआ था। भीम एक राक्षस रूपी था।

जब भगवान् राम द्वारा कुम्भकर्ण को मारा गया था। तथा भीम का जन्म उसके पिता की मृत्यु के ठीक बाद हुआ था। भीमा को इस घटना का कोई अंदाजा भी नही था, कि श्रीराम ने उसके पिता का वध किया था। जब भीम को इस बात का पता लगा की उसके पिता को राम ने मारा था। और भीम भगवान राम के पास अपने पिता की मौत का बदला लेने को आतुर हो गया। राम से बदला लेने के लिए भीम ने भगवान् ब्रम्हा की घोर तपस्या की।

भगवान् ब्रम्हा ने उसे प्रसन्न होकर दर्शन दिए। और भीम को वरदान दिया की विजयी भव का आशीर्वाद भी दिया। भगवान् ब्रम्हा से वरदान पाकर भीम राक्षस बहुत अधिक शक्तिशाली बन गया था। भीम राक्षस ने चारो तरफ अपना आतंक फैला रखा था। उस निर्दयी राक्षस ने मानव और जीव-जन्तुओ का ही नही, बल्कि देवी-देवताओं को भी परेशांन किया हुआ था। सभी के अन्दर उसके आतंक का भय बैठा हुआ था। उसने युद्ध में देवताओ को भी पराजित कर दिया था। भीम राक्षस ने बलशाली बनने के बाद सब पाठ-पूजा करना बंद कर दिया था।

और अपने बल पर अहंकार करने लगा था। भीम राक्षस अपने समक्ष सब को छोटा या बलहीन समझने लगा था। सभी देव गन उसके अत्याचारों से तंग आकर भगवान् शिव के पास गये। शिव जी पास आकर देवताओ ने शरण ली और मदद की गुहार लगाईं। भगवान शिव ने उनको शरण दी और निश्चित होने को कहा। भगवान् शिव भीम से युद्ध करने के लिए गये। भीम राक्षस को भगवान शिव ने मार गिराया और भष्म कर राख कर दिया।

इस तरह भगवान शिव ने देवताओ और मनुष्यों को भीम राक्षस के आतंक से छुटकारा दिलाया। तथा सभी देवताओ ने भगवान् शिव को इसी स्थान पर वास करने आग्रह किया। इसलिए शिव जी ने भीमाशंकर ज्योतिलिंग में एक विशाल शिवलिंग में विराजमान हुए थे। तब से ये ज्योतिलिंग पुरे विश्व में जाना जाता है।

भीमाशंकर ज्योतिलिंग मंदिर की स्थापत्य

भीमाशंकर ज्योतिलिंग हिन्दुओ का महत्वपूर्ण धार्मिक मंदिर है। ये मंदिर भारत के सह्याद्रि पर्वत पर बना है। इस मंदिर की स्थापना काफी प्राचीन मानी जाती है। इसकी स्थापना सतयुग काल से हुई थी। महाराष्ट्र के पुणे शहर से 100 किलोमीटर दूर सह्याद्रि पर्वत पर बना है। ये पौराणिक मंदिर पुरे विश्व में अपनी पहचान बनाए हुए है। यहाँ लाखो श्रद्धालु भगवान् शिव के इस रूप के दर्शन करने दूर-दराज से यहाँ आते है। भीमा मंदिर नासिक से 120 मील दूर स्थित है। ये भगवान् शिव के बारह ज्योतिलिंगो में छठे नंबर का ज्योतिलिंग है। ये मंदिर धरातल से 3250 feet की उंचाई पर स्थित है।

महादेव का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर।BHEEMAASHANKAR JYOTIRLING
भीमाशंकर मंदिर की फोटू

ये भगवान् शिव के सबसे विशाल और मोटे आकार का शिवलिंग है। इस शिवलिंग को मोटेश्वर महादेव भी कहा जाता है। इसी स्थान से भीमा नंदी बहती है, और जो आगे जाकर कृष्णा नंदी में मिल जाती है। दो नंदियो के आपस में मिलने को संगम कहा जाता है। हिन्दुओ के पौराणिक ग्रंथो के अनुसार ऐसा माना जाता है, कि पूर्ण श्रद्धा से रोज सूर्य उदय के बाद यहाँ आता है। और विश्वास के साथ जाप करते हुए भगवान् शिव के दर्शन से ही व्यक्ति के सब कष्ट दूर हो जाते है। उसके पाप नष्ट हो जाते है। अंत में स्वर्ग प्राप्त करता है।

भीमाशंकर मंदिर की संरचना-bheemaashankar mandir kee sanrachana

भीमाशंकर मंदिर की स्थापना से हिंदूओ का पौराणिक इतिहास जुड़ा हुआ है। ये हिन्दुओ का बहुत प्राचीन धार्मिक स्थल है। इस मंदिर के कुछ हिस्सों का निर्माण हाल ही में हुआ है। इसके कुछ हिस्से नव निर्मित भी है। जिनका निर्माण पर्यटक दृष्टि से मंदिर के सौन्दर्य को और बढाने के लिए किया गया है। भीमाशंकर मंदिर के निर्माण के लिए नागर शैली को अपनाया गया है। जो की भारतीय वास्तुकला का प्राचीन उदाहरण है।

और वर्तमान में इसे नयी शैली से निर्मित किया गया है। यहाँ प्राचीन और नई शैली का बेजोड़ मिश्रण देखा जा सकता है। मंदिर के शिखर को अलग-अलग आकार और प्रकार के पत्थरो से मिलाकर बनाया गया है। मंदिर के निर्माण में इंडो-आर्यन शैली का उदाहरण भी देखा जा सकता है। इस मंदिर का शिखर 18 वीं सदी में अलग-अलग शैली के कारीगरों द्वारा निर्मित किया गया था। इसको हेमादपंथी आकृति दी गई है। मराठाओ के राजा शिवाजी ने मंदिर में कई सुख-सुविधा उपलब्ध कराई है।

महादेव का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर।BHEEMAASHANKAR JYOTIRLING

जिससे मदिर में पूजा-पाठ अच्छी तरह से की जाती है। भीमाशंकर मंदिर में एक विशाल आकार का घंटा है। जो इस मंदिर की विशेषता है। यहाँ जाने पर हमे कई प्रकार के पर्यटक स्थल देखने को मिलते है। जिनमे प्रमुख हनुमान झील, गुप्त भीमशंकर, भीमा नदी की उत्पत्ति, नागफनी, बॉम्बे प्वाइंट, साक्षी विनायक आदि है। भीमाशंकर मंदिर वन क्षेत्र में होने के कारण हमे यहाँ कई प्रकार के वन्य-जीव देखने को मिलते है।

इस क्षेत्र में पक्षी, जानवर, फल, फूल आदि काफी संख्या में देखे जाते है। यहाँ देश-विदेश सभी क्षेत्रो से पर्यटक घुमने आते है। भीमाशंकर मंदिर के दर्शन कर यात्रा बहुत ही सुखद महसूस करते है। यहाँ माता कमलजा का मंदिर भी प्रसिद है। ये माता पार्वती का अवतार स्वरूप माना जाता है।

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शनीय स्थल-bheemashankar jyotirling ke darshaneey sthal

भीमाशंकर के अलावा यहाँ कई घुमने लायक जगह भी है। भीमाशंकर में कुंड यहां के मुख्य धार्मिक जल स्त्रोत है।कुंड मंदिर के निकट स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि यहा बने धार्मिक कुंड बहुत प्राचीन है। यहाँ मोक्ष कुंड, सर्वतीर्थ कुंड, ज्ञान कुंड, और कुषारण्य कुंड चार विशेष कुंड बने हुए है। महर्षि कौशिक का सम्बन्ध मोक्ष कुंड से माना जाता है। भीम नदी का उद्गम स्थान कुषारण्य कुंड बना हुआ है। भिमाशंकर मंदिर से पहले ही देवी पार्वती का मंदिर बना हुआ है।

ये यहाँ का प्रसिद्द मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में माता ने कमलजा के रूप में अवतारीत हुई थी। इसलिए इसे कमलजा माता का मंदिर कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा कहा जाता है, इस जगह पर देवी ने राक्षस त्रिपुरासुर से युद्ध में भगवान शिव की मदद की थी। युद्ध में विजयी होने के पश्चात भगवान ब्रह्मा ने देवी पार्वती की कमलों से पूजा की थी। और माता कमलजा यहाँ विराजमान हुई थी।

भीमशंकर मंदिर जाने का समय-bheemashankar mandir jaane ka samay

भीमाशंकर मंदिर घुमने का आनंद ही कुछ ख़ास होता है। और यहाँ जाने के लिए अगस्त से फरवरी के मध्य के समय में जाना सबसे अच्छा रहता है। क्योकि इस समय यहाँ का मौसम बहुत ही आनंदायक लगता है। गर्मियों के मौसम के अलावा यहाँ किसी भी सीजन में जा सकते है। तथा श्राद्धालुओ का यहाँ आने के बाद वापस जाने को मन ही नही करता है।

क्योकि लोग इसके सौन्दर्य में इतना डूब जाते है। और सब कुछ इसकी सुन्दरता के आगे छीन लगने लगता है। यहाँ लोग कई दिनों तक रुकते है। और आराम से इस स्थान का आनंद लेते है। यहाँ यात्रियों के रहने और खाने की उचित व्यवस्था की गई। मंदिर से थोडा ही दुरी पर शिनोली और घोड़ गाँव बसा हुआ है। यहाँ श्रद्धालुओ को सब सुख-सुविधा मिल जाती है।

भीमशंकर मंदिर कैसे पहुंचें-bheemashankar mandir kaise pahunchen

ज्योतिलिंग भीमशंकर घुमने जाने के लिए दो मार्ग बने हुए है। जिनमे सड़क और रेल मार्ग साधनों द्वारा जाया जाता है। महाराष्ट्र के पुणे से दिन में कई एमआरटीसी की सरकारी बसें आसानी से उपलब्ध हो जाति है। इनका समय हर सुबह 5 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है। इनमे बैठकर हम भीमाशंकर मंदिर की शेर करने जा सकते है। महाशिवरात्रि के उपलक्ष पर यहाँ काफी संख्या में भीड़ इकठ्ठा होती है। यहाँ विशाल पूजा का आयोजन होता है। जिसे देखने श्रद्धालु दुनिया भर आकर से पूजा में उपस्थित होते है।

भीमाशंकर ज्योतिलिंग मंदिर पूजा का समय-bheemaashankar jyotiling mandir pooja ka samay

भीमाशंकर मंदिर में भगवान् शिव की पूजा होती है। दिन में तीन बार पूजा का होती है। जिसके लिए समय निर्धारित किया गया है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की पूजा का दृश्य बहुत ही मनभावन होता है। महाशिवरात्री का त्यौहार यहाँ बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। ये यहाँ का प्रमुख त्यौहार है। इस दिन यहाँ देश-विदेश से लाखो श्रद्धालु आते है। और इस पूजा में उपस्थित होकर पुण्य प्राप्त करते है।

महादेव का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर।bheemaashankar jyotirling

इस समय यहाँ काफी संख्या में भीड़ रहती है। मंदिर के दरबार सुबह- 4:30 से बजे खुलते है। उसके बाद सभी लोग प्रातःकाल में पूजा करते है। आरती 5 बजे से 5:30 बजे तक की जाती है। सुबह के समय शिव के दर्शन मात्र से सभी पापो से मुक्ति मिल जाती है। दूसरी आरती का समय दर्शन- सुबह 9:30 से दोपहर 2:30 बजे तक का होता है। शाम की पूजा का समय 3 बजे 3:30 बजे से शाम 7:30 से रात 8 बजे तक रहता है।