December 12, 2019
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rann of kutch/kutch rann utsav in hindi

rann of kutch/kutch rann utsav in hindi, कच्छ का रन rann of kutch गुजरात के कच्छ शहर में उत्तर तथा पूर्व में स्थित है। rann of kutch दुनिया का सबसे विशाल नमक से बना रेगिस्तान है। यह‘रन ऑफ कच्छ rann of kutch के नाम से प्रसिद्द है। इसके बारे में अमिताभ बच्चन ने एक लाइन कही है, कि “कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा” जो बिलकुल सही है। अगर आप गुजरात घूमने आए है, तो आप कच्छ को देखने जरुर जाए। क्योकि कच्छ नहीं देखा तो गुजरात की यात्रा आपकी व्यर्थ है। कहा जाता है कि कच्छ संस्कृति, कला और परंपराओं का संजोग है। इस जगह आपको एक ही बल्कि एक से अधिक कलाओं और समुदाय के लोगों से भेट करने का अवसर मिलेगा।

rann of kutch/kutch rann utsav in hindi

गुजरात राज्य का कच्छ का रण एक बड़ा क्षेत्र है। यह थार रेगिस्तान का एक भाग है। इसका अधिकांश हिस्सा गुजरात में है, तथा शेष भाग पाकिस्तान में भी पाया जाता है। मानसून के आते ही यह व्हाइट डेजर्ट एक विशाल समुद्र में बदल जाता है। क्योकि गर्मियों के बाद कच्छ की खाड़ी का पानी यहाँ के रेगिस्तान में आकर इकठ्ठा हो जाता है। नमक के रेगिस्थान का ये नजारा भी देखने में बहुत ही शानदार नमक लगता है। कच्छ के इस रण के विषय में कई दिलचस्प बाते है। नमक का ये रेगिस्थान जुलाई से अक्टूबर-नवंबर माह तक समुद्र के जैसा दिखाई देता है। प्रत्येक साल यहाँ आयोजित होने वाले रन उत्सव पूरी दुनिया में प्रसिद है।

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इस डेजर्ट पर आप सफारी से अलावा लोकगीत और लोकनृत्यों का भी लुप्त उठा सकते हैं। यह उत्सव 38 दिनों तक चलता है, और इस उत्सव को देखने देश-विदेश से पर्यटकों की भीड़ जमा होती है। आप के मन में भी रन ऑफ कच्छ घुमने व उसके बारे में जानने के लिए यह आर्टिकल आपके काफी काम आएगा। हम आपको आर्टिकल के द्वारा आपको सम्पूर्ण यात्रा का ज्ञान कराएंगे।

रन ऑफ कच्छ का भागोल-Bhagol of run of kutch

गुजरात का रन ऑफ कच्छ लगभग 23,300 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। पहले तो ये समुद्र का ही एक हुआ करता था। सन 1819 में आए भूकंप के वजह से इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां एकदम से अलग हो गई, और यह भाग ऊपर उभर आया था। प्राचीन समय में हुए सिकंदर के समयकाल में यह नौगम्य झील के रूप में था। इसका पूरा भाग दो हिस्सों में बंटा हुआ है। इसका उत्तरी रन जिसे ग्रेट रन ऑफ कच्छ कहा जाता है, जो की 257 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। तथा पूर्वी रन इसको लिटिल रन ऑफ कच्छ कहा जाता हैं। यह ग्रेट रन ऑफ कच्छ से छोटा भाग है। यह कुल 5178 वर्ग किमी भू -भाग में फैला हुआ है। hindi भाषा में रण का शाब्दिक अर्थ रेगिस्तान से है। इस जगह गर्मियों में तापमान 44-50 डिग्री तक रहता है, व सर्दियों में तापमान शून्य से भी कम हो जाता है।

कच्छ का इतिहास – History Of Rann Of Kutch In Hindi

कच्छ के विषय में इतिहास में बताया गया है, कि कादिर नाम का कच्छ का एक द्वीप था। जो की हड़प्पा की खुदाई के दौरान मिला था। इस कच्छ पर प्रारम्भ में सिंध के राजपूतों का शासन हुआ करता था। फिर जडेजा राजपूत राजा खेंगरजी के द्वारा भुज को कच्छ की राजधानी के रूप में स्थगत कर दिया गया था। इसके बाद राजा लखपतजी कच्छ के राजा सन 1741 में बने। बाद में सन 1815 में अंग्रेजों द्वारा डूंगर पहाड़ी पर अपना अधिपत्य स्थापित कर कब्ज़ा कर लिया गया। और फिर कच्छ को अंग्रेजी जिला घोषित कर दिया गया था। ब्रिटिश शासको ने कच्छ में रंजीत विलास महल, मांडवी का विजय विलास महलो का निर्माण भी किया।

रन ऑफ कच्छ उत्सव–Kutch Rann Utsav In Hindi

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कच्छ भारत के गुजरात राज्य में स्थित है। जो दुनिया का सबसे विशाल नमक रेगिस्तानों में से एक है। कच्छ का ये महान रण अपने प्राकृतिक वैभव के कारण पुरे विश्व में ख्याति प्राप्त किये हुए है। साथी ही यहां के स्थानीय लोगों द्वारा आयोजित किया जाने वाला ”द रण उत्सव” बहुत प्रसिद्द है। प्रतिवर्ष यहाँ रण उत्सव 1 नवंबर से आरम्भ होकर 20 फरवरी तक रहता है। चांदनी रात में कच्छ के रेगिस्तान में इस उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव को देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इस समय यहाँ आप चांदनी रात और खुली हवा में कल्चरल प्रोग्राम का खूब आनंद ले सकते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत का नजारा यहाँ से आसानी से देख सकते हैं, जो कच्छ से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है।

यह रण उत्सव भारत और पाक की सीमा पर आयोजित होता है। इस रण उत्सव में आप ऊंट की सवारी का आनंद भी ले सकते हैं। प्रारम्भ में यह उत्सव केवल तीन दिन तक ही आयोजित होता था, अब इस उत्सव को पुरे 38 दिनों तक बड़े जश्न से मनाया जाता है। इस अवसर पर बहुत से कलाकारो द्वारा अपनी कलाओं का रेत पर भारत के इतिहास की झलक को दर्शाया जाता है। कच्छ की यात्रा कर आप स्थानीय लोगों की हस्तकलाओं और रहन-सहन को अच्छे से जान सकते हो।

कच्छ का रण विवाद – Rann Of Kutch Controversy In Hindi

सन 1965 में जब रण के पश्चिमी किनारे पर भारत- पाक सीमा के विषय में विवाद भी हुआ था। और फिर अप्रैल माह में सीमा को लेकर विवाद के चलते लड़ाई-झगडे भी हुए थे। तब ब्रिटेन शासको के हस्तक्षेप के बाद ही ये युद्ध समाप्त हुआ। बाद में इसकी पूरी रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव द्वारा सिक्योरिटी काउंसिल को भेजी गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रायब्यूनलद्वारा 1968 में फैसला सुनाया गया था, कि रण का 10% भाग पाक के हिस्से में रहेगा, व 90% हिस्सा भारत के पास रहेगा। सन 1969 में रण का विभाजन किया गया।

रण ऑफ कच्छ से जुडी जानकारी-Information related to Rann of Kutch in hindi

यह रण ऑफ कच्छ विश्व का सबसे विशाल सफेद रेगिस्तान माना जाता है। यह बर्फ के पहाड़ो की तरह से सफ़ेद रंग से रंगा हुआ नमक का रेगिस्तान है। जो इस क्षेत्र में लगभग 30 हजार वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहाँ पर कच्छ सी -स्विमिंग ड्रोमेडरीज भी है, जो ऊंटों के घर होते है। जिन्हें खारोई नाम से जाना जाता है। हड़प्पा संस्कृति से जुड़े ऐतिहासिक स्थल लोथल और धोलावीरा भी कच्छ में है,

जो दुनिया में प्राचीन सभ्यता के प्रतिक हैं। पुरे विश्व में लोथल को सबसे प्राचीन डॉकयार्ड के रूप में जाना जाता है, और धोलावीरा को भारत के सबसे प्राचीन टाउन प्लानिंग का प्रतिक कहा जाता है। कच्छ क्षेत्र में वाइल्ड ऐस की सबसे बड़ी आबादी का निवास करती है। कच्छ के रेगिस्तान में हम लोमड़ी और राजहंस जैसी दुलर्भ प्रजातियां देखने को भी मिलेंगी।

रण ऑफ़ कच्छ में क्या खाए -What to eat in Rann of Kutch

कच्छ क्षेत्र में निवास करने वाले लोग सरल जीवन और उच्च विचार में वाले हैं। यहाँ के लोगो का मुख्य भोजन बाजरी (बाजरा) से बना रोटलास होता है, तथा इसके साथ दूध, छास, बटर, जग्गरी, और गुड़ आदि के साथ खाया जाता है। यहाँ के लोग चावल और दाल से बनी खिचड़ी को भी बहुत चाव से खाते है। यहाँ के लोग बाहर से आये मेहमानों का भी बहुत आदर सत्कार करते है। अगर आप किसी भी व्यक्ति के घर में जाओगे, तो वे आपको एक गिलास पानी एक रिवाज के अनुसार आपके सम्मान में परोसते है। फिर आपको चाय का पूछेगे जो आज-कल सभी लोगों के बीच सार्वभौमिक पेय बन गई है। इसके बाद आपको खाने में दूध की बनी चीजें जैसे दही और घी आदि दी जायेगी।

यहाँ साधारणतया कच्छी क्युसिन में रोटी या रोटला, दही, मक्खन दूध, दाल, करी, सब्जियाँ, पापड़, कचुम्बर आदि विशेष आहार होते हैं। यदि आप की सफर पर जाते है, तो सूखी रोटियाँ या थेपला और खाकरा और सेव (चने के आटे की) लेकर जा सकते हो। जो यहाँ पर आमतौर पर लोग बनाते है। यहाँ के क्षेत्र वासियों का खाद्य मुख्य आहार हैं- खमन डोकला, गथिया, अनथिया, मुथिया, रायता, दही वड़ा, कचौरी, भजिया, बैंगन से बनी भाजी, लौकी और भिंडी से बनी उंगली आदि है। और आमतौर पर बनने वाले आहार है-डाबेली, पुरी से बदलाव के रूप में। मिठाइयों की कई वैरायटी हैं जैसे- अददिया, गुलाब पाक, सोन पापड़ी, मोहन थाल, पेड़ा, हलवा, गुलाब जामुन, जलेबी, इत्यादि खाया जाता है। तथा खाना खाने के पश्चात धानिया के बीज या धान की दाल, सुपारी या पान सुपारी आदि भी परोसा जाता है।

रण ऑफ़  कच्छ कब जाये- When to go to Rann of Kutch

रन ऑफ कच्छ जाने के लिए जनवरी में मक्रर संक्रांति के बाद का समय काफी उत्तम है। क्योकि इस समय कच्छ मौसम बहुत ही सुखद और सुहावना होता है। इस समय भीड़-भाड भी कम होती है। पूर्णिमा की रात को कच्छ के सफेद रेगिस्तान में घुमने का आनंद ही कुछ ख़ास होता है। इसके अलावा आप रन ऑफ कच्छ की यात्रा पर अक्टूबर माह में भी जा सकते है । क्योकि इस समय यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले रण उत्सव का लुप्त उठा सकते है।

कच्छ की यात्रा में इस समय आपको एक अलग ही अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। यहाँ अक्टूबर से मार्च माह तक पयर्टकों की भीड़ बहुत अधिक रहती है। दिसंबर की अंत में रन ऑफ़ कच्छ सूखना शुरू होता है, तथा इसके बाद ये पूरी तरह एक सफेद रेगिस्तान जैस स्थान बन जाता है। यहाँ देश-विदेश से उत्सव के समय काफी पर्यटकों की आते है। सभी को यहाँ के नज़ारे बहुत रास आते है।

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