November 18, 2019
mahadev ke barah jyotirling।ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन

Mahadev ke barah Jyotirling। ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन

mahadev ke barah jyotirling।ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन, ॐकारेश्वर एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है। यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। खंडवा से ओंकारेश्वर की दूरी 70 किमी है। यह नर्मदा नदी के बीच मन्धाता द्वीप पर स्थित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से चोथा ज्योतिलिंग माना जाता है। यह यहां के मोरटक्का गांव से लगभग 20 किलोमीटर दूर बसा है।ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। क्योंकि ये भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। ये चौथे नंबर का ज्योतिर्लिंग माना जाता है। ओंकारेश्वर मंदिर भारत के मध्यप्रदेश राज्य के खंडवा जिले में स्थित है। ओंकारेश्वर मंदिर इस क्षेत्र के मोटरक्का गांव से 21 किलोमीटर स्थित है । ओंकारेश्वर हिन्दू धर्म का प्रतीक श्री ॐ के आकार में बना है। सनातन धर्म में ॐ का बहुत महत्व है । हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार ॐ का उच्चारण सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा के मुख से हुआ था।

mahadev ke barah jyotirling।ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन

तब से लेकर हिंदुओ के धार्मिक ग्रथो ओर वेदों का पाठ ॐ के उच्चारण से ही किया जाता है। ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग वे स्थान है जहां भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे। उन जगहों को ज्योति रूप में भगवान शिव के रूप को स्थापित किया गया। ओंकारेश्वर में शिव ने ओमकार स्वरूप में अवतार लिया था। इसलिए ये स्थान ओंकारेश्वर ज्योतर्लिंग के नाम से जाना जाने लगा। हिन्दुओं के पौराणिक ग्रंथो जैसे स्कंद पुराण , शिवपुराण, वायुपुराण में ओंकारेश्वर मंदिर की महिमा का बहुत ही सुन्दर वर्णन मिलता है। ओम्कारेश्वर में 68 तीर्थ स्थल है ओर यहां 33 करोड़ देवी देवता विराजमान है । मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में 2 ज्योतिलिंग है। एक उज्जैन में महकलेसवेर ज्योतिलिंग है। ओर ममलेस्वर में ओंकारेश्वर है। यहां 108 प्राचीन शिवलिंग विराजमान है।

ओंकारेश्वर के दर्शनीय स्थल-Places of interest on Omkareshwar
MAHADEV KE BARAH JYOTIRLING।ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन
Omkareshwar ki photu

mahadev ke barah jyotirling।ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन यहाँ के दर्शनीय स्थल और तीर्थ स्थल की सूचि बहुत लम्बी है। ओंकारेश्वर के पास बहुर से प्राचीन मंदिर , घाट , प्राचीन इमारते देखने को है। ओंकारेश्वर धार्मिक स्थल के साथ पर्यटक स्थल में भी प्रसिद्ध है। देश और विदेश से हजारो श्रद्धालु और पर्यटक आते है। ओंकारेश्वर के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल केदारेश्वर मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, गोविंदा भगवतपद गुफा, काजल रानी गुफा, गौरी सोमनाथ मंदिर, अहिल्या घाट है । ये सभी स्थल ओंकारेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर आस पास है । ये काफी खुबसूरत जगह है

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा-Omkareshwar Jyothirlinga Story in hindi

हिन्दू धर्म के अनुसार पुरानो में विंध्याचल पर्वत से जुडी कहानी का बहुत सुन्दर व्याखान मिलता है। जिसमे नारद जी और विन्ध्याचल पर्वत के बिच हुई वार्तालाप का वर्णन इस तरह है। एक समय की बात है जब नारद जी ब्रह्म लोक से धरती लोक पर घुमने आये। तब नारद जी भ्रमण करते करते विन्ध्याचल पर्वत पर पहुचे। जो की सभी पर्वतों के राजा कहे जाते है। इस पर्वत को पर्वतराज भी कहा जाता है। पर्वतराज ने नारद जी का बहुत ही स्नेहशील रूप से स्वागत किया। और अपने बारे में बताते हुए बोला की मैं सर्व गुणों से सम्पन्न हूं। मेरे पास सब कुछ है। मेरे अन्दर कोई खामी नही है। मैं सब प्रकार से सम्पन्न पर्वत हूँ । मेरे पास सभी आवश्यक चीजों का खजाना है ।

नारद जी पर्वतराज की एसी अभिमान से भरी बाते सुनकर उभ गये थे। वे चुपचाप विन्ध्याचल पर्वत की बाते सुन रहे थे। और लम्बी साँस भर रहे थे। नारद जी के हावभाव देखकर पर्वतराज ने नारद जी से पूछा की हे नारद जी आपको मुझमे कौन सी खामी नज़र आई जिसे देखकर आपको मेरी बाते अच्छी नही लग रही है। आप मेरी बाते सुनकर लम्बी साँस क्यों भर रहे हो। पर्वतराज के इन शब्दों का उत्तर देते हुए नारद जी बोले की आपके मुख से स्वयं के प्रति बाते सुनकर मुझे आपके अहंकारी स्वरूप का आभास हुआ। तुम अपने आप को अन्य पर्वतो से श्रेष्ठ पर्वत बताते हो। यदि तुम सर्वगुण संपन्न हो तुम्हारे पास सब कुछ है।

MAHADEV KE BARAH JYOTIRLING।ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन
Omkareshwar_ke_ Narmada_ki_photu

लेकिन तुम्हारी ऊंचाई सुमेरु पर्वत जितनी नही है। वो तुसे लम्बाई और ऊंचाई में काफी विशाल है सुमेरु पर्वत जिसकी ऊंचाई देवताओ के लोक को छूती है । उसका शिखर तुम्हारे शिखर से काफी ऊँचा है। तुम्हारे शिखर का भाग कभी भी देव लोक नही पहुँच पायेगा। तुम व्यर्थ में अपने आप को सबसे से श्रेष्ठ मानते हो। ये बोलकर नारद जी वहा से वापस देव लोक की तरफ आ गये । नारद जी के ये वाक्य सुनकर विन्ध्याचल पर्वत को बहुत खेद हुआ। वह मन ही मन उनकी बातो पर विचार कर दुखी हो रहा था । नारद जी की बाते सुनकर विन्ध्याचल पर्वत निराश होकर शोक व्यक्त करने लगा। विन्ध्याचल पर्वत के काफी समय विचार करने के पश्चात उन्होंने भगवान शिव की शरण लेने का निश्चय किया।

उसने शिव के ओमकार स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की और आराधना कर ध्यान करना शुरू कर दिया । उसने 6 महीनो तक निष्फल भाव से शिव की पूजा आराधना की । पर्वतराज की आस्था से भगवान् शिव अतिप्रसन्न हुए और शिव ने विन्ध्याचल पर्वत को अपने दर्शन दिए। भगवान् शिव ने विन्ध्याचाल पर्वत से कहा की मैं तुम्हारी भक्ति और आस्था से बहुत खुश हुआ हूँ। इसलिए तुम जो चाहो वरदान मुझसे मांग सकते हो। विन्ध्याचल पर्वत ने भगवान शिव को प्रणाम किया और बोला की अगर आप सच में मुझसे प्रसन्न हुए है। तो आप मुझसे ऐसा वरदान देवे जिससे मेरी बुद्धि तीर्व हो और मेरे सभी काम मेरी इच्छा के मुताबिक सिद्ध हो जाये। भगवान् शिव ने वैसा ही वरदान उसे प्रदान किया जो वो चाहता था।

भगवान शिव के वरदान देने के बाद वहा देवलोक के और भी देव और ऋषि उपस्थित हुए। और उन सभी ने शिव से सदैव यहाँ वास करने का आग्रह किया। और कहा हे शिवशंभु आप इस स्थान पर सदा के लिए विराजमान हो। भगवान् शिव ने सभी के आग्रह को स्वीकारते हुए वहा वास करने का किया । वे लोक कल्याण के लिए उन्होंने उनकी बात स्वीकार ली । फिर ओमकार लिंग दो लिंगो में विभाजित हो गया। एक लिंग जिसे विन्ध्याचल पर्वत द्वारा बनाया गया था। उसे परमेश्वर लिंग नाम दिया गया। जिसे अमलेश्वर लिंग भी कहते है। और शिव के द्वारा जिस लिंग की रचना की गई वह ओमकार लिंग के नाम से जाना जाता है। अनाधिकाल;से आज तक ये दोनों शिवलिंग पुरे विश्व में प्रसिद है।

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा-Omkareshwar Jyothirlinga Story in hindi

हिन्दू पुराणों के अनुसार ओम्कारेश्वर से सम्बन्धित एक अन्य गाथा भी है। जिसमे मान्धाता नाम का राजा था। राजा मान्धाता भी भगवान् शिव के बहुत बड़े भक्त थे। उन्होंने भी विन्ध्याचल पर्वत पर भगवान शिव की आराधना की थी। राजा मान्धाना की कठोर तपस्या से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए। भगवान शिव ने खुश होकर राजा मान्धना को प्रकट हो दर्शन दिए। भगवान् शिव के दर्शन से कर राजा भी बहुत खुश हुए।

और उन्होंने भगवान् शिव से वरदान माँगा। की आप देव लोक से धरती लोक में वास कीजिये ताकि जिसे लोक कल्याण पूर्ण रूप से हो सके। इसलिए आप सदैव इस स्थान पर विराजमान रहे। उस समय से भगवान् शिव इस स्थान पर विराजमान हो गये थे। और उस समय से इस स्थान को ओंकार मान्धना नगरी कहा जाने लगा। जो सभी हिन्दुओ का पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ सालभर लाखो श्रद्धालु इस पवित्र स्थल के दर्शन करने आते है।

ओंकारेश्वर कैसे पहुंचे – How To Reach Omkareshwar In Hindi

ओंकारेश्वर हवाई जहाज से जा सकते है। देवी अहिल्याभाई होल्कर हवाई अड्डा इंदर ओंकारेश्वर से नजदीकी हवाई अड्डा है। वहां से आप ओंकारेश्वर पहुंचने के लिए ट्रेन, बस या कार ले सकते हैं।

महादेव के ज्योतिलिंग की जानकारी

महाकाल का महाकालेश्वर ज्योतिलिंग

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *