July 5, 2020
Holi Festival in hindi होलिका दहन और होली, होली पर्व का महत्व

Holi Festival in hindi होलिका दहन और होली, होली पर्व का महत्व

Holi Festival in hindi होली रंगों का त्योहार है, सभी धर्मों के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ होली मनाते हैं। प्रेम से भरे रंगों से सुशोभित यह त्योहार भाईचारे, बंधुत्व, धर्म, जाति से ऊपर उठ कर एकता का संदेश देता है। होली के दिन, सभी लोग अपनी पुरानी शिकायतों को भूल जाते हैं और सब को गले लगाते हैं और गुलाल लगाते हैं। बच्चे और युवा रंगों से खेलते हैं। यह त्योहार फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली के साथ कई कहानियां जुड़ी हुई हैं। होली मनाने से एक रात पहले होली जलाई जाती है। इसके पीछे एक लोकप्रिय कहानी है।

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भक्त प्रह्लाद के पिता हरिण्यकश्यप खुद को भगवान मानते थे। वह विष्णु के विरोधी थे जबकि प्रह्लाद विष्णु का भक्त था। उसने प्रह्लाद को विष्णु भक्ति करने से रोका और जब वह राजी नहीं हुआ, तो उसने प्रह्लाद को मारने की कोशिश की। प्रह्लाद के पिता ने आखिरकार अपनी बहन होलिका से मदद मांगी। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका अपने भाई की सहायता करने के लिए सहमत हो गई। होलिका प्रह्लाद के साथ चिता में बैठ गई, लेकिन प्रह्लाद विष्णु की कृपा से सुरक्षित था और होलिका जलकर भस्म हो गई थी।

यह कहानी बताती है कि अच्छाई बुराई पर विजय प्राप्त करना चाहिए। आज भी, पूर्णिमा के दिन, होली जलाई जाती है और अगले दिन हर कोई एक दूसरे को गुलाल, अबीर और अलग-अलग रंग लगाता है। यह त्योहार रंगों का त्योहार है। इस दिन लोग प्रात:काल उठकर रंगों को लेकर अपने नाते-रिश्तेदारों व मित्रों के घर जाते हैं और उनके साथ जमकर होली खेलते हैं।

बच्चों के लिए तो यह त्योहार विशेष महत्व रखता है। वह एक दिन पहले से ही बाजार से अपने लिए तरह-तरह की पिचकारियां व गुब्बारे लाते हैं। बच्चे गुब्बारों व पिचकारी से अपने मित्रों के साथ होली का आनंद उठाते हैं। सभी लोग बैर-भाव भूलकर एक-दूसरे से परस्पर गले मिलते हैं। घरों में औरतें एक दिन पहले से ही मिठाई, गुझिया आदि बनाती हैं व अपने पास-पड़ोस में आपस में बांटती हैं। कई लोग होली की टोली बनाकर निकलते हैं उन्हें हुरियारे कहते हैं।

Holi Festival in hindi, होलिका दहन और धुलेंडी की पौराणिक मान्यता

Holi Festival in hindi, होलिका दहन और धुलेंडी की पौराणिक मान्यता
Holi Festival in hindi, होलिका दहन और धुलेंडी की पौराणिक मान्यता

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होलाष्टक से जुड़ी मान्यताएं हिन्दुस्थान के कुछ प्रान्तों में मानी जाती हैं। होलाष्टक पंजाब और उत्तरी भारत में मनाया जाता है। होली उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा आदि राज्यों में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है, होलाष्टक होलिका दहन से 8 दिन पहले से माना जाता है। होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इन आठ दिनों में मांगलिक कार्य, गृह प्रवेश प्रकार के सभी सुभ कार्यों पर रोक लगा दी जाएगी। लोगो का मानना है , होलाष्टक के आठ दिनों में किए गए शुभ कार्य अशुभ फल देते हैं, इसलिए इन दिनों किसी भी नए कार्य को नही किया जाता  है।

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होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन यानी पूर्णिमा तक होलाष्टक रहता है। इस दिन से सर्दियों के दिन कम होने लगते हैं और मौसम बदल जाता है। दिन में अधिक गर्मी महसूस की जाती है। होलाष्टक की खासियत यह है कि होली से आठ दिन पहले होलिका पूजन करने के लिए, होलिका दहन के स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है और इसमें सूखे विशेष, सूखे गोबर, सूखी लकड़ी और होली की छड़ी लगाई जाती है। जिस दिन यह कार्य किया जाता है, उस दिन को होलाष्टक प्रारंभ दिवस भी कहा जाता है।

जब तक होलिका दहन संबंधित क्षेत्रों में नहीं हो जाता है, तब तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। उसके बाद होलाष्टक से लेकर होलिका दहन के दिन तक, कुछ लकड़ी एकत्र की जाती है और उसमें डाल दी जाती है। इस प्रकार होलिका दहन के दिन तक, लकड़ी का ढेर यहाँ बनाया जाता है। तब मोहल्ले के सभी निवासी होलिका दहन के लिए प्रार्थना करते हैं और अच्छे जीवन की कामना करते हैं और बच्चों की मंडली होली खेलने जाती है। होली के इस शुभ त्यौहार पर जो 5 दिनों तक मनाया जाता है, होली का त्यौहार सभी के घरों में गुझिया, भगी-श्रीखंड और पूरन-पोली बनाकर मनाया जाता है।

Holi Festival in hindi,लठमार होली, होली उत्सव के प्रसिद्ध स्थान

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उतरप्रदेश के ब्रज क्षेत्र भगवान श्री कृष्ण का स्थान है, इसलिए मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, नंदगांव और बरसाना की होली संपूर्ण बिश्व में प्रसिद्ध हैं। बरसाना की पारंपरिक लठमार होली देखने के लिए दूर-दूर से लोग एकत्रित होते हैं, और इसका आनंद लेते है। यहाँ देश विदेश से लाखो सेलानी लठमार होली का आन्दन लेन आते है और इस होली में सामिल होते है

Holi Messages in Hindi (होली संदेश) holi ke badhai sandesh

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रंगों के त्यौहार में सभी रंगों की हो भरमार,
ढेर सारी खुशियों से भरा हो आपका संसार.!
यही दुआ है भगवान से हमारी हर बार,
होली मुबारक हो आपको दिल से हर बार…!

राधा का रंग और कान्हा की पिचकारी ,
प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी .!
ये रंग न जाने कोई जात न कोई बोली,
मुबारक हो आपको रंगों भरी होली..!!
Holi Hindi Shayari in 2020

राधा का रंग कान्हा की पिचकारी,
प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी.!
यह रंग ना जाने कोई जाट ना कोई बोली,
मुबारक हो आपको रंगों भरी होली.!!
holi Shayari Hindi for Whatsapp

Holi Messages in Hindi (होली संदेश) holi ke badhai sandesh

आज मुबारक, कल मुबारक होली का हर पल मुबारक
रंग बिरंगी होली में हमारा भी एक रंग मुबारक
Shayari for Holi in Hindi

आज भर लो प्यार के रंग से पिचकारी
लाल गुलाल से रंग लो दुनिया सारी
रंग ना जाने है कोई जात और बोली
आपको हमारी तरफ से हैप्पी होली
Holi Shayari hindi

मथुरा की खुशबू, गोकुल का हार,
वृन्दावन की सुगंध ,बरसाने की फुहार..!
राधा की उम्मीद, कान्हा का प्यार,
मुबारक हो आपको होली का त्यौहार..!!
Holi Ke Liye Shayari 2020