December 15, 2019
अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi

अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in Hindi

अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi  अजमेर भारत के राज्य राजस्थान का एक मुख्य और प्राचीन शहर है। अजमेर का इतिहास और उसकी हर तारिख इतिहास के पन्नो में चमकती है। यूं तो भारत का हर शहर अपने आप में महत्व्पूर्ण है। आज अजमेर भी अपने दर्शनीय और ऐतिहासिक स्मारक के लिए विश्व भर में प्रशिद्ध है।अजमेर राजस्थान के मुख्य शहरों में एक है। और अजमेर राजस्थान का एक जिला है। ये तारागढ़ पहाड़ी के सतह पर स्थित है।

पर्वतीये छेत्र स्थित अजमेर अरावली पर्वतमाला का हिसा है।अच्छी तरह से पूर्वी तट में जयपुर और टोंक के जिलों और पश्चिमी तरफ पाली से घिरा हुआ है। जिसे ग्रीन-कार्पेट पहाड़ियों में पारिवार पवित्र शहर भी कहा जाता है। इस शहर को अजयराज सिंह रजा ने बसाया था। ये जयपुर से 135 किलोमीटर की दुरी पर है। अजमेर बहुत ही सुदर शहर है। अजमेर धर्म और संस्क्रति की पंरपराओ वाला शहर है। ये शहर दिल्ली – अहमदाबाद राजमार्ग Nh 8 से जुड़ा हुआ है। अजमेर 8841 किलोमीटर छेत्रफल में फेला है। इस छेत्र में पान की भी खेती होती है ।अजमेर बहुत ही खुबसूरत शहर है । 

अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi

राजस्थान के प्रमुख जिलो में से अजमेर जिला है । इस शहर का नाम अजयमेरु के नाम पड़ा है । चोहान रजा अजयराज ने 1113 ईस्वी में स्थापित किया था । अजमेर से 10 किलोमीटर दूर अजयपाल का मंदिर स्थित है । ये अजमेर की प्राचीन धरोहर है जो आज भी अजमेर के स्थापक की याद दिलाती है। इतिहासकारो के अनुसार अजमेर पर 700 साल तक चोहान वंस का राज रहा है। दिल्ली में मुगलो के राज के बाद अजमेर के भाग्य का फेसला मुगलों के हाथ में आ गया । 12 वीं शताब्दी में मुईनुद्दीन चिश्ती ईरान से भारत आए थे। अकबर और जहाँगीर ने इस दरग़ाह के पास ही मस्जिदें बनवाई थीं। शाहजहाँ ने अजमेर को अपने अस्थायी निवास-स्थान के लिए चुना था। निकटवर्ती तारागढ़ की पहाड़ी पर भी उसने एक दुर्ग-प्रासाद का निर्माण करवाया था

अजमेर के पर्यटक स्थल- Tourist Places of Ajmer

अजमेर में बहुत सारे पर्यटक स्थल है। जो आज विश्व भर में अपनी पहचान बनाये हुए है। अजमेर राजस्थान के मुख्य पर्यटक स्थल में से एक है । अजमेर के मुख्य पर्यटक स्थल में दौलत बाग, आनासागर झील, अजमेर शरीफ -दरगाह शरीफ,  अजमेर के करीब तीर्थराज पुष्कर , अढाई दिन का झोपडा, तारागढ़ किला  ,  फ़ॉयसागर आदि मुख्य स्थल  है। अजमेर के पर्यटक स्थल सेलानियो को पसंद आते है।

अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi

दौलत बाग अजमेर-Daulat Bagh Ajmer

दौलत बाग अजमेर का एक सुदर बगीचा है। जो आनासागर के नजदीक स्थित है । 16 सताब्दी में मुग़ल शासक जंहागीर ने आनासागर झील के पास बाग लगायाथा ।  बाद में मराठा सूबेदार बालराम 1805  इस्वी के पास शासन रहा था । जिन्होंने इस बाग़ को खुबसूरत बगीचे का रूप दिया। बाला सूबेदार ने राजा दोलत राव सिंधिया को जागिर में देना चाहते थे । और इसका उनके नाम पर दोलत बाग़ रखा गया । आज इस बाग़ को सुभाष उद्यान के नाम से जानते है ।  आजादी के बाद सरकार ने इसका नाम सुभास चन्द्र बॉस के नाम पर रखा । दौलत बाग खूबसरत गार्डन के साथ साथ पिकनिक स्पॉट है। शहर के बिच में स्थित होने की वजह से यहाँ लोग परिवार के साथ घुमने आते है ।

आनासागर झील-Lake Anasagar
अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi
आनासागर झील

आनासागर झील राजस्थान के अजमेर छेत्र  स्थित है। ये एक एक कृत्रिम झील है । आनासागर झील का निर्माण आणाजी चोहान ने करवाया था। आणा जी चोहान प्रथ्वीराज चोहान के पिताहम थे। आणाजी ने 1135 – 1150 इस्वी के बिच इस झील का निर्माण करवाया था । और इस झील को उनके नाम { आणा जी } से ही आनासागर झील की पहचान बन गई । आनासागर झील लगभग 13 किलोमीटर के छेत्र में फेली है। सन 1637 में मुग़ल शासक शाहजहाँ पुननिर्माण करवाया।  शाहजहाँ इस झील के किनारे 1240 फिट लम्बा कटहरा लगवाया । छोटी छोटी पहाडियों के बिच स्थित ये झील बहुत सुंदर है । शहर के पास बनी आनासागर झील अजमेर का मुख्य पर्यटक स्थल है । संध्या के समय इस झील का नजारा बहुत ही सुहाना हो जाता है। आनासागर झील पर्यटको और फोटोग्राफ़र की पहली पसंद है।

दरगाह अजमेर शरीफ़-Ajmer Sharif 
अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi
अजमेर शरीफ़

अजमेर शरीफ़ राजस्थान  के अजमेर में स्थित प्रसिद्ध दरगाह है। अजमेर शरीफ दर्गगाह सूफी संत मोइंनुदीन चिश्ती का मकबरा है। ये बाहरवी शताब्दी से अजमेर में स्थित है। दरगाह अजमेर शरीफ का मुख्य द्वार को कहते है।  इसका निर्माण सन 1911 में मीर उस्मान अली खा ने करवाया था।सन 2015 में  ख्वाजा चिश्ती का 800 वा महाउस्तव मनाया गया है। आज अजमेर शरीफ की दरगाह दुनिया में सर्वधर्म सद्भाव की अद्‍भुत मिसाल है। कहते है अजमेर शरीफ की दरबार में किसी की झोली खाली नहीं रहती है। इनके दर पे गरीब अमीर, छोटे बड़े का भेद भाव नहीं होता है । कहते है 800 साल में जिसने भी अजमेर शरीफ की चोखट को चूमा है, उसकी झोली भरी है । महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुदीन चिश्ती की दरगाह अजमेर शरीफ हर दर्म के लोगो को प्रेम का संदेश देती है

तीर्थ स्थल पुष्कर -Pilgrim place Pushkar

राजस्थान के पर्यटक स्थल-Rajasthan Tourist places in Hindi-tourword

पुष्कर शहर राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित हैं। अजमेर से पुष्कर की दुरी 15 किलोमीटर है। पुष्कर को संस्कृति और ब्रह्मा का शहर भी कहा जाता हैं। ये हिन्दूओ के प्रमुख धर्म स्थल में एक है। ब्रह्मा जी का एक मात्र मंदिर पुष्कर में ही बना हुआ हैं। राजस्थान का पुष्कर शहर भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है।  यहां आयोजित होने वाले ऊंट मेला के लिए पुष्कर विश्व प्रसिद्ध हैं। जो हर वर्ष में नवम्बर के महीने में धूम-धाम से मनाया जाता हैं। राजस्थान का पुष्कर बहुत ही प्यारा पर्यटक स्थल है । हिन्दुओ  की आस्था के अनुसार पुष्कर के जल में स्नान करने व डुबकी लगाने का विशेष ही महत्व माना जाता है। पुष्कर के बारे ज्यादा जाने…

दिन का झोंपड़ा अजमेर -Half-day hut 

अढ़ाई दिन का झोंपड़ा अजमेर में स्थित एक प्राचीन इमारत है। यह ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह अजमेर शरीफ से कुछ ही दूरी पर स्थित है। कहा जाता है की ये एतिहासिक संस्क्रत विधालय था। जो सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय के नाम से जाना जाना जाता था। इस के परसिर में भगवान् विष्णु का मंदिर भी था। जिसका निर्माण बीसलदेव चोहान ने सन 1153 में करवाया था। जिसको सन 1192 में मोहम्मद गोरी के सासन काल मस्जिद का रूप दे दिया गया । माना जाता है, इस काम को करने में ढाई दिन ही लगे थे। और इस लिए इस इमारत का नाम अढाई दिन का झोंपड़ा  पडा। यहाँ भारतीय शेली अलंकृत स्तंभों का उपयोग किया गया है। इस मस्जिद में बासुरी की मीनारे निर्मित है। इस इमारत में बहुत से गुंबद और स्तंब है जिन पर खुबसूरत नक्काशियों का काम किया गया है इस इमारत अढाई दिन का झोंपड़ा के बारे बहुत सी बाते चर्चित है यहाँ हर साल अढाई दिन का मेला भी लगता है

 
तारागढ़ का किला अजमेर-Taragarh’s fort Ajmer

अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi

तारागढ़ का किला राजस्थान के अरावली की पर्वत एक ऐतिहासिक धरोहर है। अजमेर के ढाई दिन का झोंपड़ा के पश्चिम में 700 फिट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। इस किले को पहले अजयभेरू के नाम से जाना जाता था 11 सदी में सम्राट अजय पाल ने करवाया था। इस किले का निर्माण  विदेशी और मुगलों के आक्रमणों से सुरक्षा के लिहाज से करवाया गया था । मेवाड़ के राजा प्रथ्वी राज अपनी रानी तारा के लिए इस किले का पुननिर्माण करवाया था। जिसके कारण इस किले का नाम तारागढ़ का किला प्रशिद्ध हुआ। तारागढ़ का किला राजस्थान के मुख्य दर्शनीय स्थलों में एक है। ये अजमेर की ऐतिहासिक इमारत है । इस किले केपरसिर बने महल अपनी शिल्पकला एंव  चित्रों के कारण अद्बुत लगते है। इन महलों में छत्रमहल, अनिरूद्ध महल, रतन महल, बादल महल और फुल महल प्रमुख है।तारागढ़  में प्रवेस के लिए तीन प्रवेस द्वार है। इनको लक्ष्मी पोल, फूटा दरवाजा और गागुडी का फाटक के नाम बोला जाता है।

अजमेर का इतिहास-History of Ajmer in hindi

राजस्थान के मुख्य स्थल 

जयपुर का जयगढ़ किला

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