December 6, 2019
15 अगस्त 1947 का इतिहास।HISTORY OF 15 AUGUST 1947

15 अगस्त 1947 का इतिहास।History of 15 August 1947

  15 अगस्त 1947 का इतिहास।History of 15 August 1947,15 अगस्त 2019 नजदीक आ रहा है, 15 अगस्त पर को लाल किले में प्रधानमंत्री का भाषण   होता है सम्पूर्ण भारत में हर साल 15 अगस्त का पर्व मनाया जाता है। क्योकि ये दिन सभी भारतवासियों जीवन में बहुत महत्व रखता है। 15 अगस्त 1947 को हमारा भारत देश अंग्रेजो के शासन से आजाद हुआ था। 15 अगस्त के दिन पुरे भारतवर्ष में उत्सव मनाया जाता है। इस दिन को सभी भारतीय राष्ट्रीय त्यौहार के रूप मनाते है। 15 अगस्त के दिन हर साल भारत देश के प्रधानमंत्री के द्वारा दिल्ली में स्थित लाल किले के लाहौरी गेट पर तिरंगा फहराया जाता है। इस दिन प्रधान मंत्री पुरे देश को संबोधित करते है।

15 अगस्त 1947 का इतिहास-History of 15 August 1947

15 अगस्त 1947 का इतिहास।History of 15 August 1947,स्वतंत्रता के बाद भारतीय उपमहाद्वीप पर यूरोपीय व्यापारियों ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। यूरोपीय व्यापारियों ने 17 वीं शताब्दी में भारत के उपमहाद्वीप पर अपना अधिपत्य स्थापित किया। फिर यहाँ अपने व्यापारिक और औधोगिक कार्यशैली स्थापित की गई। ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी कर भारत पर व्यापारिक साम्राज्य स्थापित कर लिया। 18 शताब्दी के अंत तक ईस्ट इण्डिया कंपनी ने भारत के सभी राज्यों को वशीभूत कर लिया था। और सभी राज्यों पर अपना अधिपत्य स्थापित किया।

भारत में सन 1857 में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात भारत सरकार द्वारा अधिनियम 1858 जारी हुआ। इस अधिनियम के दौरान भारत पर ब्रिटिश क्राउन जो ब्रिटेन की राजशाही थी , उसका आधिपत्य भारत पर स्थापित हो गया था। धीरे-धीरे भारतीय नागरिको ने अपने स्तर में विकास किया। भारत में इसके फलस्वरूप 1855 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उदय हुआ। भारत में हुए प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात ब्रिटिश समय काल में भारत में सुधार कार्य हुआ।

ब्रिटिश शासन द्वारा किये गये थे। मोटेगू-चेम्सफोर्ड की भारतीय सुधारो में गणना की जाती है। ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाया गया ये अधिनियम भी रोलेट एक्ट के सामान भारतीयों को दबाने के मकसद से ही बनाया हुआ था। इस अधिनियम की घोषणा ब्रिटिश द्वारा की गई। और इस अधिनियम के कारण भारतीय समाज सुधारको ने स्वशासन के अधिकार का आह्वान किया। इसके फलस्वरूप भारत में ब्रिटिस सरकार के विरुद्ध कई आन्दोलन किये गये थे।

महात्मा गाँधी के नेतृत्व में राष्ट्रवादी अहिंसा, असहयोग आन्दोलन , सविनय अवज्ञा आन्दोलन भारतीय नागरिको द्वारा किये गए थे। ब्रितानी कानूनों में कुछ समय बाद सुधार देखा गया ,और सन 1930 के दशक के चुनावो में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 195-197 दशक राजनीतिक क्षेत्र में काफी खीचा तानी वाला रहा था। राजनीतिक दृष्टि से इस समय काफी बदलाव आये।

भारत के द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय लोगो की सहभागिता का असर देखा गया। कांग्रेस द्वारा किये गये असहयोग आन्दोलन के अंतिम परिणाम और भारतीय मुस्लिम द्वारा राष्ट्रवाद का उदय हुआ। 1947 में स्वतंत्रता के दौरान भारत में राजनीतिक गतिविधिया काफी हद तक बढ़ गई थी। जिसके कारण पुरे भारत में तनावपूर्ण स्थित बन गई थी। और इस उपमहाद्वीप के आन्दोलन के कारण अंत में इसे दो हिस्सों में बाँट दिया गया था। जिसका एक हिस्सा भारत और दूसरा पकिस्तान में विभाजित हुआ था।

स्वतंत्रता से पहले स्वतंत्रता दिवस-Independence day before independence

ब्रिटिश सरकार के शासन से आजादी पाने के लिए भारत की जनता ने कड़ी मेहनत की थी। भारतीय लोगो ने कई आन्दोलन और स्वतंत्रता दिवस समारोह किये थे। जिससे ब्रिटिश सरकार से छुटकारा पाया जा सके। और भारतीय नागरिको ने राष्ट्रीयता के लिए कई राष्ट्रवादी कार्य किये थे। उन्होंने जनता के मध्य राष्ट्रवादी ईधन झोकने व भारत को स्वतंत्रता देने में लिये ब्रिटिश सरकार को मजबूर किया था। इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया था।

सन 1930 से 1950 के समय काल के दौरान कांग्रेस ने 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया था। कांग्रेस के साथ भारत के अन्य लोगो के द्वारा भी स्वतंत्रता की शपथ ली गई थी। जवाहर लाल नेहरू ने इन सब का विवरण अपनी आत्मकथा के द्वारा किया था। जिसमें उन्होंने बताया की इन बैठकों में बिना भाषण और उपदेश के लोगो को समझाना बहुत ही मुश्किल कार्य है। इस स्थिति में गंभीरता से विचारविमर्श और शांतिमय ढंग से कार्य किया जावे।

इस विषय गाँधी जी के विचार ये थे,कि बैठकों के साथ हमे इस दिन को कुछ रोमांच और रचनात्मक कार्य करने चाहिए। कताई काटना या फिर हिन्दू और मुस्लिम लोगो में आपसी मेलजोल करना, और निषेध कार्य, या अछूतों की सेवा करना। 1947 को भारत पूर्ण रूप से आजाद हुआ था। और इस दिन भारत को वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। भारत में 26 जनवरी 1947 को भारतीय सविधान को पारित किया गया था। भारत में उस दिन के बाद से ही इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा था।

राष्ट्रीय स्तर पर-Nationally

भारत में 15 अगस्त और 26 जनवरी का पर्व पुरे भारत वर्ष में बहुत शांतिपूर्ण और सास्कृतिक रूप से मनाया जाता है। इस देश के राष्ट्रपति द्वारा स्वतंत्रता दिवस के पहले की शाम को राष्ट्र के नाम को संबोधन दिया जाता है। और दुसरे दिन सुबह के समय दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराया जाता है। तिरंगो की शान के लिए 21 तोपों की सलामी दी जाती है। देश के प्रधानमंत्री द्वारा देश को संबोधित किया जाता है। संबोधन में देश के नागरिको को अपने देश के प्रति जागरूक किया जाता है। और इसके बाद वहा स्थित सभी लोगो और राष्ट्रीय कैडेट कोर सदस्यों द्वारा राष्ट्रगान गाया जाता है।

राष्ट्रगान के प्रारम्भ करने से पूर्व सभी लोग सावधान की मुद्रा में खड़े होते है। इसके बाद स्कूल व कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा सास्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देश के सार्वजनिक प्रसारण सेवा दूरदर्शन चैनल द्वारा किया जाता है। स्वतंत्रता दिवस की शाम को राजधानी, सभी सरकारी दफतरों और संसद भवनों को विधुतिये उपकरणों से रंग विरंगी तरह से सजाया जाता है। ये नज़ारा बहुत ही प्यारा लगता है।

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