November 19, 2019

जयपुर का इतिहास और पर्यटन स्थल| Full history of Jaipur

जयपुर का इतिहास और पर्यटन स्थल| Full history of Jaipur राजस्थान की राजधानी जयपुर पिंक सिटी देशी-विदेशी सैलानियों की पहली पसंद है। चारो ओर से आरवाली पर्वतमलाओ की गोद में बसा जयपुर शहर । शानदार महलों ओर भवनों वाले इस शहर को बनाते समय इसमें आवागमन के लिए 7 प्रवेश द्वार बनाए गए थे। बता दें कि जयपुर शहर जहां बसा हुआ है, वहां कभी 6 गांव हुआ करते थे।

जिस 6 गांवों को जोड़कर जयपुर को बसाया गया था उन गांवों पुराना नाम आज के वर्तमान के नामों से भिन्न थे। – नाहरगढ़, तालकटोरा, संतोषसागर, आज का मोती कटला, गलताजी और आज के किशनपोल को मिलाकर जयपुर को बनाया गया था। – सिटी पैलेस के उत्तर में एक झील तालकटोरा हुआ करती थी। इस झील के उत्तर में एक और झील थी जो बाद में राजामल का तालाब बन गई । जयपुर शहर को बसाते समय सड़कों और अन्य मार्गो का विशेष ख्याल रखा गया था शहर की मुख्य सड़कों  की चौड़ाई पर खास ध्यान दिया गया।

शहर के मुख्य बाजार त्रिपोलिया बाजार में सड़क की चौड़ाई 110 फीट रखी गई तो वहीं हवामहल के पास ड्योढ़ी बाजार की  105 फीट की सड़क बनाई गई। जौहरी बाजार दुकानों के बरामदे से जौहरी बाजार की सड़क की चौड़ाई 90  फीट से ज्यादा रखी गई। वहीं पास के चांदपोल बाजार की सड़क  94 फीट चौड़ी बनाई गई। जयपुर के बसने के समय के समय की कुछ यादें के बारे में जानकर बताते है की उस समय मुख्य बाजारों के दोनों तरफ एक साइज की भवनों को बनाने पर ध्यान जोर दिया गया था ।

मुख्य सड़कों के दोनों ओर के भवनों को बाजार की तरफ झांकते हुए बनाने की स्वीकृति दी गई तो सभी भवनों का आकार और ऊंचाई एक जैसी हो इस का  खास ख्याल  रखा गया। जौहरी बाजार आज भी सबसे सुन्दर और एक रूप में दिखता हैं। ऐसे ही सुन्दर भवन सिरह ड्योढ़ी बाजार में देखने को मिलते हैं। इस बाजार को हवामहल जैसा सुन्दर बनाया गया।

चान्दपोल से सूरजपोल गेट पश्चिम से उत्तर की ओर है और यहां मुख्य सड़क दोनों गेटों जोड़ती है। बीच-बीच में चौपड़ है। त्रिपोलिया के सामने चौपड़ तो नहीं चौक बनाई गई।  यहां के प्रमुख भवनों में सिटी पैलेस, 18वीं शताब्दी में बना जंतर-मंतर, हवामहल, रामबाग पैलेस और नाहरगढ़ किला शामिल हैं। अन्य सार्वजनिक भवनों में एक संग्रहालय और पुस्तकालय शामिल है

जयपुर का इतिहास और पर्यटन स्थल Full history of Jaipur

जयपुर राजस्थान की राजधानी होने के अलावा, जयपुर राज्य का सबसे बड़ा शहर है। शहर की प्रतिष्ठता और यहां की प्राचीन संस्कृति का अतीत 18 शताब्दी की याद ताजा करती है और इसका श्रेय महान योद्धा और खगोल विज्ञानी महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय को जाता है। जयपुर का गौरवशाली अतीत शहर के महलों और किलों में आज भी जीवित है जिसमें एक शाही परिवार रहा करता था।

राजसी किले और हवेलियाँ, विशाल सुंदर बगीचे, सुंदर मंदिर, शांत परिदृश्य और समृद्ध व यहां की सांस्कृतिक विरासत ने जयपुर को दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक आदर्श स्थान बना दिया है। जयपुर का नजारा बहुत ही मनमोहक है जैसे ही आप इस शहर में कदम रखते हैं तो  आपको एक खुशी और प्रसन्नता अनुभव होती है। जयपुर शहर के गुलाबी रंग के भवनों और इमारतें आप के दिल को लुभाने वाला एक रोमांटिक आकर्षण लाता है। अगर आपके पास जयपुर के राजसी गौरव का अनुभव नहीं है, तो अभी अपनी यात्रा की योजना बनाएं !

जयपुर को गुलाबी नगरी क्यों कहा जाता है (पिंक सिटी) ?

जयपुर , राजस्थान की राजधानी जयपुर की आज विश्व भर में अपनी एक अलग पहचान है जयपुर आज अपने इतिहास के दुनिया के हर कोने में फेमस है। लोग अब जयपुर को पिंक सीटी “गुलाबी नगरी” के नाम से लोकप्रिय है क्योंकि यहाँ की संरचनाओं के निर्माण के लिए गुलाबी रंग के पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। सालाना करोड़ों विदेशी पर्यटक जयपुर को घूमने आते है ओर अपने कमरे में जयपुर के सौंदर्य को कैद कर ओर दिल में दुबारा देखने का अरमान लेकर जाते है।

कोई भी पर्यटक पिंक सिटी को देख चुका है, वह इस बात को साबित कर सकता है कि जयपुर के सभी भवन गुलाबी रंग के हैं। दरअसल गुलाबी रंग मेहमानों के आदर सत्कार का प्रतीक है इसलिये जब 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स के जयपुर आने की सूचना मिली तो उनके स्वागत में महाराजा सवाई मानसिंह ने पूरे शहर को गुलाबी रंग  पुतावा दिया था। तभी से इस शहर का नाम { pink sity} गुलाबी नगरी पड़ा।

 जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह ने मेहमानों का स्वागत करने के लिए पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंगवा दिया था। लोगों द्वारा इस परंम्परा का ईमानदारी से पालन किया गया।ओर आज भी ये परम्परा कायम है । रंग, समृद्धि और सुंदरयता में गुलाबी नगरी , जयपुर शहर भारत के सबसे खूबसूरत और आकर्षक शहरों में से एक है।

पिंक सिटी जयपुर टूरिस्ट के लिहाज से सबसे अच्छा स्पॉट है।जयपुर शहर के विशाल आकर्षण और सुंदर बसावट का वर्णन करने के लिये निसंदेह हमारे पास शब्दों की कमी पड़ जाएगी। जयपुर की संस्कृति, वास्तुकला, परंपरा, कला, आभूषण और वस्त्र आदि यात्रियों को हमेशा में मन भावन लगता हैं। जयपुर शहर ऐसा शहर है, जिसे आधुनिकीकरण के बाद भी अपनी प्राचीन सभ्यता और गौरवशाली अतीत के लिए भी माना जाता है। आज दुनिया भर से रोज हजारों पर्यटक इस गुलाबी नगरी को देखने आते है ।

जयपुर के दर्शनीय स्थल की सूची/List Of Jaipur Tourist Place To Visit In Hindi

हवा महल – हवा महल भी जयपुर का प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है।महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने इस महल को 1799 में बनवाया था । हवा महल में कुल 953 खिड़कियाँ बनाई गई थी, ताकि हवा आसानी से आ – जा सके इसलिए ये महल विश्व भर में हवा महल के नाम से जाना जाता है। इस महल को 5 मंजिला ईमारत गई है और इस महल में उपर – नीचे जाने के लिए सीढ़ियां नहीं बल्कि इसमें धलानुमा रेप है जो राजशाही स्त्रियों के लिए इसका निर्माण किया गया था। इसे लाल गुलाबी पत्थरों से बनवाया गया है. यहाँ पुरातात्विक संग्रहालय भी है,

सिटी पैलेस जयपुर में सिटी पैलेस प्रसिद्ध स्थान है।इसका निर्माण  सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1729 से 1732 ई. वी. के मध्य करवाया था । इस महल परिसर में देखने योग्य बहुत – सी जगह है जिनमे प्रमुख है जैसे –   चन्द्र महल, प्रीतम निवास चौक, दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, महारानी पैलेस, भग्गी खाना, गोविन्द देव जी मंदिर और मुबारक महल आदि है। चन्द्र महल को संग्रहालय बना दिया गया है, जहाँ पर आवश्यक सामान हथकरघा उत्पाद और अन्य सामान रखा जाता है। जो राजस्थान राज्य की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यहाँ की वास्तुकला बहुत ही सुन्दर है जिसे देखकर सब लोग तारीफ करते है । ओर यहां से आपको जयपुर पिंक सिटी का नज़ारा बहुत ही प्यारा एवं अद्भुत लगता है।

जयपुर का इतिहास और पर्यटन स्थल| Full history of Jaipur

जंतर मंतर वेधशाला       जंतर मंतर विश्व की सबसे बड़ी एकमात्र वेधशालाओं है। इसका निर्माण  महाराजा जय सिंह द्वितीय के समय में कराया गया था । धुपघड़ी वेधशाला  यहाँ खगोलीय  वेधशाला दुनिया की सबसे बड़ी वेधशाला में से है। महाराजा जय सिंह द्वितीय को वास्तुकला, खगोल विज्ञान, दर्शन सहित अन्य  विषयों में  अभीरुचि थी। खगोल विज्ञान में महाराजा जय सिंह द्वितीय की  विशेष रूचि थी और इसलिए इन्होंने  देश की सबसे बड़ी वेधशाला का निर्माण शुरू करवाया। उनके पास समय को मापने वाला  ज्यामितीय डीवाईस भी पाया जाता था। जिससे वे तारामंडल की स्थिती की जानकारी प्राप्त करते थे। और सबसे बड़े तारे की आसपास की स्थिति का अवलोकन किया करते थे। दुनिया भर में खगोलविदों और आर्किटेक्टर की प्ररेणा स्वरूप ही खगोलीय उपकरणों का निर्माण किया गया ।

नाहरगढ़ किला  नाहरगढ़ का किला ( nahwrgarh fort) अरावली की पहाड़ियों में स्थित है, जहाँ से पूरा जयपुर दिखाई देता है। इसे पहले सुदर्शन गढ़ के नाम से बी जाना जाता , जानकर बताते है जब ये बन रहा था, तब यह के सर्वगिये राजा नाहर सिंह की आत्मा यहाँ अंदर निवास करती थी और इसके निर्माण कार्य को देखा करती थी, जिसके बाद इसका नाम नाहरगढ़ रख दिया गया. इसे 1734 में बनवाया गया था,  फिल्म ‘रंग दे बसंती’ और शुद्ध देशी रोमांस, फिल्म के लिए भी सीन को यहाँ फिल्माया गया है।

जयगढ़ किला      जयगढ़ का किला ( jaigarh fort) नाहरगढ़ से 12 किलोमीटर दूर अरावली पहाड़ियों में, चील का टीला पर स्थित है. यहाँ से आमेर पैलेस भी 2 किलोमीटर की दूरी पर है जो साफ साफ दिखाई देता है. जयगढ़ किल को 1726 में आमेर  की रक्षा की लिहाज से जय सिंह 2 के द्वारा निर्माण करवाया गया था. जिसे बाद में इनका नाम जय सिंह के नाम पे रखा गया था.इसे विजय किला के नाम से भी जाना जाता है. इसकी आकार आमेर पैलेस के जैसी है,

अम्बर किला    अम्बर का किला  को आज आमेर किला  ( Amer Fort ) के नाम जानते है जो अरावली की पहाड़ियों में जयपुर से 11 किलोमीटर दूर स्थित है. इसका निर्माण 1592 ईसवी में राजा मानसिंह द्वारा किया गया था। राजा जय सिंह प्रथम के सासन काल में और विशाल बनाया गया था। इस महल का निर्माण लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर के पत्थर को मिलाकर किया गया था, जो हिंदू-मुस्लिम वास्तुकला के एक मिश्रण दर्शाता हैं ।पूर्व दिशा की ओर  इसका मुख्य द्वार है। इस महल के 3 अन्य द्वार भी है। इस महल में  अंबर पैलेस में चार आंगन हैं, जहाँ दीवान-ए-आम भी है.। इस महल में आपको हाथी पर घूमने व सवारी करने का अवसर भी मिलेगा । हाथी की सवारी आप पूरे महल में कर सकते है।

जयपुर जू    जयपुर जू को 1877  ईस्वी में बनाया गया । इसको 2 जगहों  पर  विभाजित किया गया है । क्योंकि इसमें एक भाग में पक्षियों को रखा गया है जो जयपुर सिटी के अंदर है और दूसरा आमेर किले के पास है दूसरे में जानवरो को रखा जाता है। यहाँ दुनिया भर में पाई जाने वाली 50  से भी ज्यादा पशु पक्षियों की प्रजाति देखने को मिलती है। यहां कम से कम जानवरो की 550 प्रजाति देखने को मिलती है । भारत के सबसे बड़े चौथे घड़ियाल प्रजनन की स्थापना वर्ष 1999 में की गई थी ।

रामगढ़ लेक   रामगढ़ लेक को  मानव निर्मित लेक माना जाता है। यह जयपुर से 32 किलोमीटर दूर स्थित है। एशियन गेम्स का नौकायन इवेंट 1982 में इसी लेक में हुआ था। बरसात के समय ये लेक पूरी तरह पानी से लबालब भर जाता है। जिससे यह जयपुर के लोगों के लिए सबसे अच्छा पिकनिक स्पॉट साबित होता है।

 हाथी सफारी    हाथी की सवारी के शौकीन पर्यटक को यहां हाथी कि सवारी करने का मौका भी आसानी से मिल जाता है क्योंकि आमेर किला के पीछे की अरावली चोटी पर यह हाथी की सफारी होती है। हाथी की सवारी का लोग खूब लुप्त उठाते है। ये सभी को बहुत अच्छा लगता है । ये सवारी खेतो और किलो के मध्य से होकर अरावली के जंगलों के बीच में शिविर तक ले जाते है। यहाँ से हम  जंगल की ख़ूबसूरती का नज़ारा आसानी से देख सकते है । रात के समय में की गई ये सवारी बहुत ही आनन्दायक होती है।

होली फेस्टिवल (holi festival Jaipur)

भारत में होली का त्योहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है जयपुर में होली के दिन फेस्टिवल मनाया जाता है.होली के 5 /7 रोज पहले से ही इस फेस्टिवल की त्यारिया शुरू हो जाती है  इस मौके पर हाथी पोलो गेम, हाथी रेस, रस्साकशी एवं हाथी डांस होते है. इस भव्य फेस्टिवल की शुरुवात ऊँठ, घोड़े डांस के द्वारा होती है. इसके साथ ही इस मौके पर राजस्थान फोल्क डांस होता है. हाथी को अच्छे वस्त्र एवं जेवर से सजाया जाता है. सबसे सुंदर हाथी को गिफ्ट भी दिया जाता है. इस हाथी फेस्टिवल को जयपुर में बहुत सालों से मनाया जा रहा है. सन 2012 एवं 2014 में इस फेस्टिवल को जानवरों की रक्षा के लिए कैंसिल कर दिया गया था. लेकिन अब इसे होली फेस्टिवल के नाम से फिर से शुरू किया गया है

जयपुर बस एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि अपने इतिहास और वीरता का अतीत बयां करता है ।आप भी जयपुर भ्रमण कर एक अलग ही आनंद का अनुभव कर सकते है.

जयपुर जाने का तरीका (How to reach Jaipur)

रोड के द्वारा (By Road) – जयपुर का अंतर्राष्ट्रीय बस अडा आज पूरे भारत से जोड़ता है। नई दिल्ली, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और गुजरात आज से भारत के हर राज्य के लिए बीस सेवा मौजूद है। और यहाँ से रोज अच्छी बसें चलती है. हमारे देश की राजधानी दिल्ली से जयपुर सिर्फ 250 किलोमीटर दूर है, जो दिल्ली, मुंबई (NH8) के बीच नेशनल हाईवे से जुड़ा हुआ है. जिससे रोड के द्वारा अपनी कार या बस से आसानी से जाया जा सकता है. यहां से (ताज महल ) आगरा भी 250 किलोमीटर है।

एयरप्लेन के द्वारा (By Air) – जयपुर में अन्तराष्ट्रीय एअरपोर्ट है, जो ओल्ड सिटी से 10 किलोमीटर की दुरी पर है. यहाँ से रोज भारत के बड़े शहरों के लिए डोमेस्टिक फ्लाइट चलती है, साथ ही आबू धाबी, दुबई एवं दुनिया के हर देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय फ्लाइट उड़ान भरती है।

ट्रेन के द्वारा (By Train) – जयपुर एक बहुत बड़ा जंक्शन है. देश के हर छोटे बड़े शहर से यहाँ रेल्वलाइन  जुड़ा से हुआ है। यहाँ जाकर आप मेट्रो का भी मजा ले सकते है. जयपुर में मेट्रो ट्रेन भी चलती है, जो 2015 में ही शुरू हुई है।

जयपुर विश्वप्रसिद्ध प्लसे 

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