October 15, 2020
Ashok Stambh In Hindi ! अशोक स्तंभ का इतिहास और संपूर्ण जानकारी

Ashok Stambh In Hindi ! अशोक स्तंभ का इतिहास और संपूर्ण जानकारी

 Ashok Stambh In Hindi आज हम यहां पर आपको अशोक स्तंभ Ashok Stambh) के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। यहां पर हम आपको Ashok Stambh की पूरी जानकारी शेयर करेंगे। जैसे अशोक स्तंभ Ashok Stambh कहां पर स्थित है (where is ashok stambh), अशोक स्तम्भ का इतिहास क्या है (what is ashok stambh) और अशोक स्तम्भ में शेरों का महत्व क्या है, अशोक स्तंभ का इतिहास और अशोक स्तंभ की संपूर्ण जानकारी (All Information About Ashok Stambh In Hindi) शेयर करेंगे, तो दोस्तों अशोक स्तंभ की जानकारी के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।

अशोक स्तंभ का इतिहास – Ashok Chinh – Ashok Stambh History in Hindi
अशोक स्तम्भ (अशोक पिलर) की बनावट – Ashok Stambh in Hindi
अशोक स्तंभ में शेरों का महत्व – Importance Of Ashok Stambh Lions In Hindi
भारत में अशोक स्तंभ कहां स्थित है –Ashok Stambh In India In Hindi
अशोक स्तंभ दिल्ली Ashoka Pillar Delhi In Hindi
अशोक स्तंभ सारनाथ – Ashoka Pillar Sarnath In Hindi
अशोक स्तंभ इलाहाबाद – Ashoka Pillar Allahabad In Hindi
अशोक स्तंभ वैशाली – Ashoka Pillar Vaishali In Hindi
सांची का अशोक स्तंभ – Ashok Pillar Sanchi In Hindi

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Ashok Stambh In Hindi ! अशोक स्तंभ का इतिहास और संपूर्ण जानकारी

सम्राट अशोक मौर्य वंश का तीसरे शासक थे, चक्रवती अशोक सम्राट प्राचीन काल में एशिया दीप के सबसे शक्ति शाली राजा थे, सम्राट अशोक ने 273 ई.पू. से 232 ई. पू. अपने जीवन में भारत पर राज किया। अशोक के साम्राज्य में अधिकांश भारत, दक्षिण एशिया और उससे आगे, अब का अफगानिस्तान और पश्चिम में फारस के कुछ हिस्सों, पूर्व में बंगाल और असम और दक्षिण में मैसूर शामिल हुआ था। दक्षिण एशिया और उससे आगे और अधिकांश भारत में आता था।

सम्राट अशोक को बौद्ध साहित्य में एक क्रूर और निर्दयी सम्राट के रूप में बताया गया है। फिर जब कलिंग का युद्ध हुआ तब अशोक सम्राट ने बौद्ध धर्म अपनाकर Buddhist बन गये, और अपना सम्पूर्ण जीवन बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और सेवा में लगा दिया, सम्राट अशोक अपना पूरा जीवन बौद्ध धर्म के नाम कर दिया। अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार सिर्फ भारत में ही नहीं पूरे विश्व में कई जगहों पर किया। पुरे भारत में सम्राट अशोक ने कई जगहों पर स्तूपों का निर्माण करवाया, सम्राट अशोक इसमें बहुत ही लोकप्रिय हो गये थे।

अशोक स्तंभ का इतिहास – Ashok Chinh – Ashok Stambh History in Hindi

अशोक स्तंभ का इतिहास – Ashok Chinh - Ashok Stambh History in Hindi
अशोक स्तंभ का इतिहास – Ashok Chinh – Ashok Stambh History in Hindi

बौद्ध धर्म अपनाने के बाद सम्राट अशोक ने अपना पूरा जीवन बोद्ध धर्म के प्रचार में लगा दिया,अशोक सम्राट ने भारत से आगे बाद कर अन्य देशों में भी बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया। उनके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा ने बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए श्रीलंका गये। सम्राट अशोक ने तीन सालों में करीब 84 हजार स्तूपों (ashok stamba) का निर्माण करवाया, उसने भारत में भी कई जगहों पर स्तम्भ भी बनवाये थे। ये स्तंभ भारत में आज भी बहुत ही प्रसिद्ध है।

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अशोक स्तम्भ (अशोक पिलर) की बनावट – Ashok Stambh in Hindi

सारनाथ का स्तंभ धर्मचक्र प्रवर्तन की घटना पर आधारित है, यह स्तंभ चुनार के बलुआ पत्थर से बना हुआ है, और लगभग 45 फुट लंबे प्रस्तरखंड का है। धरती में गड़े हुए आधार को छोड़कर इसका दंड गोलाकार है, ये जेसे जेसे उपर बढता है, इनका आकर पतला होता जाता है, दंड के ऊपर इसका कंठ और कंठ के ऊपर शीर्ष है, कंठ के नीचे उलटा कमल है, इनके गोलाकार कंठ चक्र से चार भागों में विभक्त है। उनमें क्रमश: हाथी, घोड़ा, सांढ़ तथा सिंह की सजीव प्रतिकृतियाँ उभरी हुई है। कंठ के ऊपर शीर्ष में चार सिंह मूर्तियाँ हैं जो एक दुसरे के विपरीत दिशा में है , जिसकी पीठ एक दूसरी से जुड़ी हुई हैं।

इन चारों शेरों की मूर्तियों के बीच एक दंड 32 तिल्लियों के धर्मचक्र धारण किये हुए हे। ये धर्मचक्र भगवान बुद्ध के 32 महापुरुष लक्षणों का प्रतीक के जैसा हे। ये Sarnath Stambh दिखने में बहुत ही अदभुत है। इस समय स्तंभ का निचला भाग अपने मूल स्थान में है। शेष संग्रहालय में रखा है। धर्मचक्र के केवल कुछ ही टुकड़े उपलब्ध हुए। चक्ररहित सिंह शीर्ष ही आज भारत गणतंत्र का राज्य चिह्न है।

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अशोक स्तंभ में शेरों का महत्व – Importance Of Ashok Stambh Lions In Hindi

अशोक स्तंभ में शेरों का महत्व – Importance Of Ashok Stambh Lions In Hindi
अशोक स्तंभ में शेरों का महत्व – Importance Of Ashok Stambh Lions In Hindi

बुद्ध को शेर का पर्यायवाची बौद्ध धर्म में माना गया है। इसलिए ही बुद्ध के द्वारा उपदेश दिए गये धर्म चक्र परिवर्तन सुत को बुद्ध की सिंह गर्जना कहा गया है।बुद्ध के पर्यायवाची शब्दों में शाक्यसिंह व नरसिंह आते हैं। ये दहाड़ते हुए शेर धर्म चक्र परिवर्तन के समान दृष्टीमान हैं।

जब बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ तब उनके भिक्षुओं ने चारों दिशाओं में जाकर लोक कल्याण के लिए बहुजन हिताय सुखाय का आदेश इसिपतन मृगदाव में दिया था। जो कि आज सारनाथ के नाम से प्रसिद्ध हैं। इसलिए सम्राट अशोक जो चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र और मौर्य काल के तीसरे सम्राट ने स्तम्भ के चारों ओर सिंह गर्जना करते हुए सिंहों को बनवाया। आज के समय में इन्हें ही Ashok Stambh कहा जाता है।

भारत में अशोक स्तंभ कहां स्थित है –Ashok Stambh In India In Hindi

सम्राट अशोक ने भारत के विभिन्न हिस्सों में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए स्तंभों का निर्माण कराया और बुद्ध के उपदेशों को इन स्तंभों पर शिलालेख के रुप में उत्कीर्ण कराया। यहां हम आपको अशोक महान द्वारा बनवाये गए कुछ मुख्य स्तंभों के बारे में बताने जा रहे हैं। जेसे Ashoka Pillar Delhi, Ashoka Pillar Sarnath, Ashoka Pillar Allahabad, Ashoka Pillar Vaishali, Ashok Pillar Sanchi, अदि है !

अशोक स्तंभ दिल्ली Ashoka Pillar Delhi In Hindi

अशोक स्तंभ दिल्ली Ashoka Pillar Delhi In Hindi
अशोक स्तंभ दिल्ली Ashoka Pillar Delhi In Hindi

दिल्ली का यह अशोक स्तम्भ तीन शताब्दी ईसा पूर्व महान् सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था। सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया स्तंभ दिल्ली स्थित फिरोजशाह कोटला में स्थित है। यह स्तम्भ 13.1 मीटर ऊंचा है और यह पॉलिश किए गये बलुआ पत्थर से निर्मित है। अशोक ने इसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में बनवाया था। पहले यह स्तंभ मेरठ में स्थित था लेकिन फिरोज शाह तुगलक जब सन् 1364 के आसपास मेरठ आया तो इस स्तंभ की खूबसूरती देखकर मोहित हो गया। इसके बाद वह मेरठ में लगे इस अशोक स्तंभ को दिल्ली ले जाकर अपने किले में स्थापित करवा लिया।

अशोक स्तंभ सारनाथ – Ashoka Pillar Sarnath In Hindi

सम्राट अशोक का एक स्तंभ सारनाथ में स्थित है। सारनाथ में अशोक महान ने 250 ईस्वी में बनवाया था। सारनाथ का स्तंभ अशोक स्तंभ के नाम से जाना जाता है। सारनाथ स्थित स्तंभ के शीर्ष पर चार शेर बैठे हैं। सारनाथ के अशोक स्तंभ को भारत ने राष्ट्रीय प्रतीक के रुप में बनवाया था। इसके अलावा अशोक स्तंभ के निचले भाग में स्थित चक्र को भारतीय तिरंगे के मध्य भाग में रखा गया है। सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ सारनाथ संग्रहालय (Sarnath Museum) में रखा गया है। अशोक स्तंभ पर तीन लेख लिखे गए हैं जिनमें से पहला लेख अशोक के ही समय का है और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है। जबकि दूसरा लेख कुषाण काल एवं तीसरा लेख गुप्त काल का है।

अशोक स्तंभ इलाहाबाद – Ashoka Pillar Allahabad In Hindi

इलाहाबाद का अशोका स्तंभ इलाहाबाद किले के बाहर स्थित है। इलाहाबाद का अशोका स्तंभ का निर्माण 16 वीं शताब्दी में अकबर करवाया था। अशोक स्तंभ के बाहरी हिस्से में ब्राह्मी लिपि में अशोक के अभिलेख लिखे हैं। 200 ई. में समुद्रगुप्त अशोक स्तंभ(Ashok Stambh) को कौशाम्बी से प्रयाग लाया और उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग-प्रशस्ति इस पर खुदवाया गया। इसके बाद 1605 ई. में इस स्तम्भ पर मुगल सम्राट जहाँगीर के तख्त पर बैठने की कहानी भी इलाहाबाद स्थित अशोक स्तंभ पर उत्कीर्ण है। माना जाता है कि 1800 ई. में स्तंभ को गिरा दिया गया था लेकिन 1838 में अंग्रेजों ने इसे फिर से खड़ा करा दिया।

अशोक स्तंभ वैशाली – Ashoka Pillar Vaishali In Hindi

अशोक स्तंभ वैशाली – Ashoka Pillar Vaishali In Hindi
अशोक स्तंभ वैशाली – Ashoka Pillar Vaishali In Hindi

बिहार राज्य के वैशाली में यह अशोक स्तम्भ स्थित है। कलिंग के युद्ध के बाद जब सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया था और बौद्ध धर्म का अनुयायी बन चुका था। भगवान बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश वैशाली में दिया था। उनकी याद में सम्राट अशोक ने वैशाली में इस अशोक स्तम्भ का निर्माण करवाया था। वैशाली स्थित अशोक स्तंभ अन्य स्तंभो से काफी अलग है। स्तंभ के शीर्ष पर त्रुटिपूर्ण तरीके से एक सिंह की आकृति बनी है जिसका मुंह उत्तर दिशा में है। इसे भगवान बुद्ध की अंतिम यात्रा की दिशा माना जाता है।स्तंभ के बगल में ईंट का बना एक स्तूप(Stup) और एक तालाब है, जिसे रामकुंड के नाम से जाना जाता है। यह बौद्धों के लिए एक पवित्र स्थान है।

सांची का अशोक स्तंभ – Ashok Pillar Sanchi In Hindi

यह अशोक स्तंभ तीसरी शताब्दी में बनवाया गया था, जो मध्यप्रदेश के सांची में स्थित है। और इसकी संरचना ग्रीको बौद्ध शैली से प्रभावित है। यह सारनाथ स्तंभ से भी काफी मिलता जुलता है। सांची स्थित अशोक स्तंभ के शीर्ष पर चार शेर बैठे हैं। जिसकी पीठ एक दुसरे से जुडी हुई है, सदियों पुराना होने के बावजूद यह अशोक स्तंभ नवनिर्मित दिखाई देता है।