September 22, 2020
शानदार जैसलमेर किले का इतिहास – Jaisalmer Fort History In Hindi

शानदार जैसलमेर किले का इतिहास – Jaisalmer Fort History In Hindi

जैसलमेर किला  – Jaisalmer Fort, शानदार जैसलमेर किले का इतिहास – Jaisalmer Fort History In Hindi  भारत एक प्राचीन धोरोहर और ऐतिहासिक  देश है। इस देश में एक से बॾ कर एक नायाब धरोहर है। जो आज भी अपने इतिहास और वीरता की कहानी बयां करती है। राजस्थान में जयपुर से 560 किलोमीटर दूर और पाकिस्तान सीमा से सटा जैसलमेर का किला इसका एक बड़ा उदाहरण है, जो  750  साल पुराना इतिहास दर्शाता है। ये दुर्ग 250फीट त्रिकोण आकार की पहाड़ी पर स्थित है।इस पहाड़ी की लंबाई 150फीट और चौड़ाई 750फीट है। इस किले  का निर्माण 1156 शताब्दी में रावल जेसल ने शुरू करवाया था ।

इसलिए इस किला का नाम रावल जेसल के नाम पर रखा गया ।जैसलमेर किला थार रेगिस्तान के एक ट्रिकुंता पर्वत पर खड़ा है।इस किले की दीवार पीले रंग के भारी पत्थरों से बनी है ।सूर्य उदय के समय सूर्य की किरणों  में ये किला हल्के सुनहरे रंग का दिखता है।इस कारण इस किले को सोनार किला (गोल्डन फोर्ट ) भी कहा जाता है। जैसलमेर के बीचों बीच बना ये किला जैसलमर की एहतिसिक धरोहर है, जो आज विश्व भर में प्रसिद्ध है।आज देश – विदेश से लाखों पर्यटक और इतिहासकार  देखने आते है। इस किले के चार प्रवेश द्वार है जिसमें एक द्वार पे तोपे लगी हुई है ।इस किले का मुख्य द्वार का नाम अखेपोला है ।

शानदार जैसलमेर किले का इतिहास – Jaisalmer Fort History In Hindi

शानदार जैसलमेर किले का इतिहास – Jaisalmer Fort History In Hindi
शानदार जैसलमेर किले का इतिहास – Jaisalmer Fort History In Hindi

इस किले की दीवारों 3 परत है जो इस किले की सुरक्षा के हिसाब से बनाई गई है इस किले में  99 किले है जैसलमेर का किला इतना बड़ा और विशाल है कि युद्ध के सयम पूरी जनता को उनकी हिफाजत के लिए अंदर रख सकते थे आज भी इस किले में 4000 से ज्यादा लोग रहते है इन लोगों के वंशज यहां काम करते थे तभी से ये लोग इस किले में रह रहे है समय के अनुसार जैसलमेर की जनसंख्या बढ़ती गई । जैसे जैसे लोग त्रिकुंटा पर्वत के नीचे चारो और लोग बसने लगे ।+

उस जमाने में जैसलमेर शहर भारत के मध्य एशिया के व्यापारियों को जोड़ने का अहम मार्ग था। व्यापारियों समान से लदे उंटो के लंबे लंबे कांरवा इस शहर में रुकने लगे । धीरे धीरे राजस्थान के दूसरे शहरों के धनी व्यापरी आ कर बसने लगे और फिर भारत के अन्य राज्यो से भी आए बड़े व्यापारियों ने बड़ी बड़ी हवेलियां बनाई । जैसलमेर शहर में पीले और सुनहरे रंग के पत्थरों से बनी ऎसी कई विशाल और सुंदर हवेलियां है जो आज भी  मोह लेती है।

जैसलमेर किले से सूर्य उदय होते देखना का एक अलग ही नजारा है सोनार किल पर पड़ने वाली सूर्य की पहली किरण को सुबह जल्दी उठ के देखना दिल में गहरा सकून देता है जो दिल को मीठा सा अहसास दिलाता है। इस छोटे से छेत्र में फैले शहर में पर्यटक पदेल ही घूमते हुए मरुस्थल तक पहुंच सकते है। बलुई रेत बड़े बड़े टीलो से घिरा  जैसलमेर जब सांझ को रेत के सुनहरी चादर में अपने आप को  पाकर सभी का मन प्रफुल्लित महसूस होता है । दूर दूर तक फैले रेत के टीले और बलुई पर्वतो को सांझ के समय देख कर चारो और शांति का अहसास होता है ।

पटवा की हवेली-  जैसलमेर किले के जैन मंदिर के पास   गुमन चंद पटवा ने पांच बेटो के लिए बनाई ये हवेलियां है जिसका नाम है पटवा की हवेली है जो जैसलमेर की खास धरोहर है जिसका निर्माण 18 वी सदी में हुआ था। इसका निर्माण पीले बलवा पत्थरों से बनी पटवा हवेली का निर्माण पूर्ण होने में चार दशक से ज्यादा का टाइम लगा। हवेली के बाहरी छज्जे, झरोखे, दीवालों के पीछे छुपे गुप्त रैक, सीढ़ियाँ, बैठक, रसोई घर, दीवारों पर बनें भित्ति चित्र और छतों पर की गई नक़्काशी मन को मोह लेती है ।