November 18, 2019
महादेव का सोमनाथ मंदिर / mahadev ka somnath mandir

महादेव का सोमनाथ मंदिर / Mahadev ka somnath mandir

महादेव का सोमनाथ मंदिर / mahadev ka somnath mandir सोमनाथ मंदिर भारतवर्ष के दक्षिण एशिया के भूखंड के पश्चिम किनारे पर स्थित है। ये हिन्दुओ का अत्यंत प्राचीन मंदिर है। सोमनाथ मंदिर भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है । महादेव भोलेनाथ के 12 ज्योतिलिंग में सोमनाथ को प्रथम ज्योतीलिंग माना जाता है। ये मंदिर गुजरात प्रान्त के काठयावाड क्षेत्र समुन्द्र के किनारे में स्थित विश्व प्रसिद धार्मिक स्थल है। इस क्षेत्र को शुरू में प्रभास नामक क्षेत्र भी कहा जाता था। यहाँ भारत का प्राचीनतम सूर्य मंदिर स्थित है। ये भारत के एतिहासिक मंदिर में से एक है। सोमनाथ मंदिर के बारे में एसा माना जाता है की ये गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित है। सोमनाथ भारत के 12 ज्योतिलिंगो में सबसे महत्वपूर्ण व सबसे अग्रिम माना जाता है। सोमनाथ मंदिर का विवरण भारत के एतिहासिक व वैदिक ग्रंथो के ऋग्वेद में किया गया है। इसका निर्माण स्वयं चन्द्र देव के द्वारा करवाया गया था।


सोमनाथ मंदिर हिन्दुओ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से इसका विशेष महत्व माना जाता है। इस न्दिर का इतिहास जटिल माना जाता है। हिन्दू धर्म के पुराणों में स्पष्ट रूप से इसके उत्थान और पतन किस्सों की परिवेचना की गई है। सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत ऐशवरियापूर्ण और वैभवशाली रहा था। और कारणवंश इस मंदिर को तोड़ कर इसका पुननिर्मित किया गया था। सोमनाथ मंदिर बहुत सुन्दर धार्मिक स्थल होने के साथ ये बहुत ही अच्छा पर्यटक स्थान भी है।

महादेव का सोमनाथ मंदिर / mahadev ka somnath mandir

महादेव का सोमनाथ मंदिर / mahadev ka somnath mandir
Somnath Mahadev

सालभर में लाखो यात्री यहाँ सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने और यहाँ घुमने आते है। वर्तमान में सोमनाथ मंदिर का पुननिर्माण भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा किया गया था। सोमनाथ मंदिर का निर्माण कार्य भारत की पश्चात आरम्भ किया गया था। भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा द्वारा सन 1995 में 1 दिसम्बर को राष्ट्र को सौंप दिया। इसके बाद ये मंदिर पुरे विश्व भर में पर्यटन स्थल के नाम से प्रसिद हो गया है। सोमनाथ मंदिर हिन्दुओ की आस्था का प्रतिक है । सोमनाथ मंदिर में हर रोज शाम 7 बजे के बाद मंदिर के आँगन में यहाँ के स्थानीय लोगो द्वारा मंदिर में पूजा अर्चना व भजन कीर्तन का कार्यक्रम होता है।

और एक घंटे तक रेडिओ साउंड चलता है।जिसमे सोमनाथ के इतिहास की कथा का बहुत सुन्दर विवेचना होती है। इसके एतिहसिक व धार्मिक लोककथाओं के अनुसार ये कहा जाता है। की इस जगह भगवान् श्री कृष्ण ने अपनी कई लीलाए की है। भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने जरा नाम के व्याध के बाण को निमित्त बनाकर अपनी लीला का साक्षात्कार दिया था। पौराणिक लोककथाओ के अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण ने इसी स्थान पर अपना देहत्याग किया था। इसी वजह से इस स्थान का हिन्दुओ के धर्म में बहुत महत्व माना जाता है।

भारत सरकार द्वारा इसकी देखरेख व इसकी व्यवस्था को बनाये रखने के लिए कई प्रयास किये । सोमनाथ मंदिर की व्यवस्था प्रणाली को बनाये रखने और संचालन कार्य किये है। जिसके लिए सोमनाथ ट्रस्ट बनाया गया और इस ट्रस्ट को सोमनाथ मंदिर की सारी व्यवस्था सौंपी गई है। सरकार द्वारा इस सोमनाथ ट्रस्ट को जमीन भी प्रदान की है। इस जमीन पर ट्रस्टीज के लोगो द्वारा इसमें सुन्दर बाग़ बगीचे , पेड़ पौधे , फल फूलो आदि से सुसर्जित किया गया है। ये हिस्सा पर्यटकों को बहुत भाता है। यहाँ देश विदेश से आये पर्यटक विश्राम करने के लिए ठहरते है। चैत्र , भाद्रपद और कार्तिक मास में यहाँ बहुत भीड़ एकजुट होती है। क्योकि इन महीनो में अपने पितृ श्राद्ध करना का खास महत्व माना है। इन महीनो में यहाँ श्रधालुओ की भरी भीड़ लगती है ।

महादेव सोमनाथ की कथा – somnath ki katha

महादेव का सोमनाथ मंदिर / mahadev ka somnath mandir
mahadev somnath ka mandir

प्राचीन हिन्दू ग्रंथो में बताई गई कथा के अनुसार राजा दक्ष परजापति 27 कन्या थी । सोमनाथ अर्थात् चन्द्र का विवाह उन सभी 27 कन्याओ से हुआ था । परन्तु चन्द्र का समस्त लगाव उन सभी पत्नियो में रोहानी नाम की पत्नी से था । वह अपना सारा प्यार और सामान रोहानी को ही देते थे । इस कारण चन्द्र की अन्य पत्निया अप्रसन्न रहने लग गई । और सब ने मिल कर अपनी व्यथा अपने पिता राजा दक्ष परजापति को सुनाई । राजा दक्ष ने चन्द्र देव् को बहुत बार समझाया । परन्तु रोहिणी के प्रभाव से उनके समझाने का कोई असर नहीं हुआ । इस पर राजा दक्ष परजापति चन्द्रदेव क्रोधित हो गये । और चन्द्र देव को श्राप दे दिया की हर रोज तुम्हारा तेज कम होता रहेगा । श्राप के प्रभाव से चन्द्र की चमक कम होने लगी ।

श्राप से विचलित और दु:खी चन्द्र ने महादेव भोलेनाथ की आराधना शुरू कर दी । और विधि विधान से चंद्रदेव ने सारा कार्य पूर्ण किया । सोम अर्थात चन्द्र देव से महादेव भोलेनाथ प्रसन्न हो कर चन्द्र को श्राप मुक्त किया । चन्द्र के कष्ट हरने वाले महादेव भोलेनाथ का यहाँ स्थापन हुआ । और उनका नाम करण सोमनाथं हुआ । पावन प्रभासक्षेत्र में स्थित इस सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का वरण माहाभारत और श्री भगवत गीता में विस्तार से बताई गई है। सोमनाथ ज्योतिलिंग महादेव के 12 ज्योतिलिंग में प्रथम ज्योतिलिंग है।

सोमनाथ कैसे पहुंचें?/

वायु मार्ग- सोमनाथ केशोड हवाई अड्डा 55 किलोमीटर दूर स्थित है।  केशोड और सोमनाथ के बीच बस व टैक्सी सेवा भी है।

रेल मार्ग- सोमनाथ के सबसे नजदीक वेरावल रेलवे स्टेशन है, जो वहां से मात्र सात किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहाँ से भारत के हर शहर के लिए ट्रेन सेवा उपलब्ध है

सड़क मार्ग – सोमनाथ वेरावल से 7 किलोमीटर  दूरी पर स्थित हैं। पूरे राज्य में इस स्थान के लिए बस सेवा उपलब्ध है।

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