April 4, 2020
जोधपुर घूमने लायक जगह/jodhpur dekhne layak jagah

जोधपुर घूमने लायक जगह/jodhpur dekhne layak jagah

जोधपुर घूमने लायक जगह/jodhpur dekhne layak jagah जोधपुर शहर जिसे मारवाड़ भी बोलते है , जोधपुर अपनी मीठी बोली के लिए पुरे भारत में फेमस है और यहाँ की भांषा , वेशभूषा , रंग बिरंगे राजस्थानी  परिधान सब को अपनी और आकर्षित करते है। जोधपुर शहर में घूमने के लिए बहुत ऐसे स्थान हैं जो शहर के शाही इतिहास और संस्कृति में डूबे हैं। जोधपुर, नीले रंग में रंगे मकानों से भरा पड़ा है। प्राचीन इमारतें और इनके बीच से निकलती घुमावदार गलियां उन गलियों में लाल गुलाबी पगड़ी बांधे धोती कुर्ता पहने वहा के वासिंदे बहुत ही मनमोहक लगते है। जोधपुर के मस्तक पर विराजमान हैं मेहरानगढ़ का किला और उम्मेद भवन।

ऐतिहासिक रुप से समृद्ध शहर की खूबसूरती में ऐतिहासिक इमारतें ,राव् जोधा डेज़र्ट रॉक पार्क चार चांद लगा देते हैं। भव्य महलों से लेकर प्राचीन किलों तक, जोधपुर के शाही अतीत की झलक आती है। जोधपुर, जयपुर के बाद राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण इस शहर को दो उपनाम भी है ‘सन सिटी’ और ‘ब्लू सिटी’।जोधपुर के चमकीले धूप के मौसम के कारण ‘सन सिटी’ नाम दिया गया है, जबकि ‘ब्लू सिटी’ नाम शहर के मेहरानगढ़ किले आसपास स्थित नीले रंग के घरों के कारण दिया गया है।

जोधपुर घूमने लायक जगह/jodhpur dekhne layak j

जोधपुर शहर 1459 ईस्वी  में राठौड़ परिवार के राजा राव जोधा द्वारा बसाया गया था। पहले इस  शहर को मारवाड़ नाम से जाना जाता था। जोधपुर विभिन्न त्योहारों, जो वर्ष भर आयोजित होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव शहर के पोलो ग्राउंड में हर साल 14 जनवरी को आयोजित किया जाता है। इस तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है जिसमें दुनिया भर से पतंग उड़ाने वाले जन प्रतिनिधि भाग लेते हैं। इस अवसर के दौरान वायु सेना के नौजवान हेलीकाप्टरों द्वारा छोड़े गये पतंगों के साथ आकाश रंगीन हो जाता है। आज जोधपुर के राजसी गौरव को देखने आये बड़ी संख्या में देश विदेश के पर्यटक को अपनी ओर लुभाता है। चमक दमक से भरपूर इस शहर में घूमने पर आप राजस्थान के मरुभूमि के कुछ बेहतरीन पर्यटन स्थल घूम सकते हैं। एक दिन में इस शहर को घूम पाना मुश्किल है। तो आइए हम आपको बताते हैं घूमने लायक कुछ चुनिंदा पर्यटन स्थल यहां हम आपको जोधपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी दे रहे हैं।

जोधपुर घूमने लायक जगह/jodhpur dekhne layak jagah

जोधपुर का उम्मेद भवन पैलेस

जोधपुर घूमने लायक जगह/jodhpur dekhne layak jagah
जोधपुर का उम्मेद भवन

जोधपुर शहर में ऊंचाई पर स्थित उम्मेद भवन पैलेस कला और इतिहास का एक अदभुत उदाहरण है उम्मेद भवन पैलेस आज भी शाही परिवार का निवास स्थान है और साथ में इस महल के कुछ हिसे को होटल में  तब्दील किया गया है। इस महल का निर्माण सन 1928 से 1943 के बीच जोधपुर के राजा उम्मेद सिंह ने करवाया था। राजा उम्मेद सिंह के नाम पर ही इस महल का नाम पड़ा। इस महल के पास 26 एकड़ का एक विशाल खूबसूरत बगीचा भी है। इसे बनाने में पूर्वी और पश्चिमी परंपराओं को मिश्रित किया गया है। महल को बनाने में राजपूतों से लेकर पुनर्जागरण काल की वास्तुकला को साथ लाया गया है। सुनहरे पत्थरों से बने महल में 64 लग्ज़री कमरे और  एक संग्रहालय भी है।

जसवंत थाड़ा
पूरी तरह से सफेद पत्थर से बने जसवंत थाड़ा रात को चाँद की दूधिया रोशनी में बिलकुल ताजमहल की तरह दीखता है। इस किले के नक्काशीदार बुर्ज और बेहद ही खूबसूरत गुंबद दिनभर सूरज की रोशनी में चमकते रहते हैं। जोधपुर शहर की भीड़ भाड़ की गलियों से दूर यहाँ शांत और एकांत स्थान आपको काफी लुभाएगा। मेहरानगढ़ किले के पास बनी इस इमारत का निर्माण महाराज जसवंत सिंह द्वितीय की याद में बनाया गया था। ये महल राजपूत राजाओ के वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरण है।  इस शाही महल में राठौर वंश से जुड़े प्रभावशाली चित्रों और शानदार कलाकृतियों का एक संग्रह भी है। इतिहास पसंद करने वाले लोगों को जोधपुर शहर के इस स्थान को अवश्य देखना चाहिए।

मेहरानगढ़ का किला

मेहरानगढ़ का किला बलुआ पत्थर से बना है इस किले का निर्माण सन 1460 में महाराजा राव जोधा ने करवाया था। मेहरानगढ किले के  विशाल परिसर, दिवारों पर जटिल नक्काशी, सुन्दर शाही हॉल और अंदर राजसी सजावट को देख कर जोधपुर के महाराजाओ राजसी ठाठ की झलक दर्शाती  है। ये किला एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है जो चारो ओर ऊँची विशाल दिवारों से घिरा है  यहां से पूरा जोधपुर शहर दिखाई देता है। इस किले में बना संग्रहालय आपको अपने शानदार अतीत की कहानी बताता है । किले के संग्रहालय में शाही पालकी, तलवारें, प्राचीन चित्र और पुराने संगीत वाद्ययंत्र प्रदर्शन के लिए रखे हुए हैं। किले के एक हिस्से में तोप रखी है। यह किला  वास्तुकला राजपूत संस्कृति की याद ताजा कराता है। इस किले से सूर्यास्त के समय जोधपुर शहर का बहुत ही शानदार मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है।

मंडोर गार्डन
मंडोर गार्डन जोधपुर शहर की एक प्राचीन धरोहर स्थल है पहले मंडोर मारवाड़ की राजधानी थी। मंडोर गार्डन जोधपुर से उत्तर दिशा में 10 किलोमीटर दूर स्थित है। जो ऐतिहासिक होने के साथ शहर की प्राकृतिक खूबसूरती को भी बढ़ाता है। मंडोर गार्डन छठी शताब्दी में बनाया गया था।  यहां एक सरकारी संग्रहालय भी  है। पत्थर की बनी छत के कारण वास्तुकला का यह अदभुत नमूना लोगों को आकर्षित करता है इसके साथ ही गहरे लाल रंग की छतरियां और शानदार ग्रीन गार्डन भी है जिसमें पेड़ो-पौधों की बहुत सारी प्रजातियां हैं।  इस परिसर बनी महाराज अजीत सिंह की छतरी  बहुत अनोखी लगती है और देखने में काफी खूबसूरत है। अगर आप जोधपुर आये तो इसे देखना बिल्कुल भी मिस ना करे ।

कायलाना झील
कायलाना झील इस ऐतिहासिक शहर की ऐतिहासिक झील है जो जोधपुर की खूबसूरती को और बढ़ाती है। ये कृत्रिम झील है  और इस झील का निर्माण सन 1872 में प्रताप सिंह के द्वारा करवाया गया था। यह झील सिटी से 9 किलोमीटर पश्चिम में है।  इस झील के आसपास का इलाका पक्षीओ से भरा रहता है पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरो के लिए ये स्पॉट अच्छा है इसलिए ज्यादातर पर्यटक  इसी झील को देखने आते हैं। घूमने लायक जगह

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